उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां की घुमावदार सड़कें और तेज रफ्तार वाहन अक्सर जानलेवा हादसों का कारण बनते हैं। हाल ही में हरिद्वार और रुद्रप्रयाग जिलों में दो अलग-अलग घटनाएं घटीं, जिनमें तीन लोगों की जान चली गई।
ये हादसे न सिर्फ परिवारों को सदमा पहुंचा रहे हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं, और उत्तराखंड जैसे इलाकों में ये संख्या लगातार बढ़ रही है, जहां मौसम और सड़कों की हालत चुनौतीपूर्ण होती है।
हरिद्वार में ट्रक की चपेट में आए दो बच्चे
हरिद्वार जिले के खानपुर इलाके में एक दुखद घटना हुई, जहां स्कूल जा रहे दो नाबालिग भाई-बहन एक तेज रफ्तार ट्रक की वजह से हादसे का शिकार हो गए। ये दोनों प्रहलादपुर गांव के रहने वाले संदीप शर्मा के बच्चे थे, जो लक्सर के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई करते थे। 13 साल का लड़का और 12 साल की लड़की रोज की तरह स्कूटी पर सवार होकर जा रहे थे, जब गोवर्धनपुर कस्बे के पास गलत दिशा से आते ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी।
ऐसे हादसे अक्सर तब होते हैं जब वाहन चालक नियमों की अनदेखी करते हैं, जैसे गलत साइड से ड्राइविंग या स्पीड लिमिट तोड़ना। आस-पास के लोगों ने फौरन मदद की और पुलिस को सूचित किया। परिवार वाले भी जल्दी पहुंचे और बच्चों को अस्पताल ले गए, लेकिन अफसोस कि लड़के की जान नहीं बच सकी। लड़की की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है, और डॉक्टर उसका इलाज कर रहे हैं।
स्थानीय पुलिस अधिकारी नवीन नेगी ने बताया कि ट्रक मालिक से पूछताछ की जा रही है, और शिकायत मिलते ही केस दर्ज होगा। ये घटना हमें याद दिलाती है कि नाबालिगों को वाहन चलाने की इजाजत न देने के नियम कितने जरूरी हैं, क्योंकि भारत में 18 साल से कम उम्र के बच्चों को ड्राइविंग लाइसेंस नहीं मिलता।
रुद्रप्रयाग की खाई में गिरी बाइक, युवक की मौत
रुद्रप्रयाग जिले में भी एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां गुप्तकाशी से कालीमठ जाने वाले रास्ते पर एक बाइकर खाई में गिर गया। 32 साल के मनोज रावत, जो कविल्ठा गांव के रहने वाले थे, कालीमठ मंदिर की ओर जा रहे थे। सड़क से करीब 50 मीटर नीचे गिरने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पहाड़ी इलाकों में ऐसी दुर्घटनाएं आम हैं, जहां सड़कें संकरी और मोड़ भरी होती हैं, और थोड़ी सी लापरवाही बड़ी त्रासदी बन जाती है।
पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन टीम और ऊखीमठ तहसील की पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने शव को स्ट्रेचर से ऊपर लाकर जिला अस्पताल भेजा, जहां पोस्टमॉर्टम किया गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने कहा कि टीम ने तेजी से रेस्पॉन्स किया, लेकिन युवक की जान नहीं बच सकी। उत्तराखंड में हर साल हजारों हादसे होते हैं, और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटा से पता चलता है कि बाइक दुर्घटनाएं कुल हादसों का बड़ा हिस्सा हैं। हेलमेट पहनना और स्पीड कंट्रोल जैसे उपाय इनसे बचाव कर सकते हैं।
ये दोनों घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। सरकार की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन आम लोगों को भी नियमों का पालन करना होगा। अगर आप भी उत्तराखंड में यात्रा कर रहे हैं, तो सतर्क रहें और सुरक्षित ड्राइविंग को प्राथमिकता दें।







