Vishwakarma Puja Muhurat 2025 : इस साल विश्वकर्मा पूजा बेहद खास रहने वाली है क्योंकि 17 सितंबर को एक साथ तीन शुभ संयोग बन रहे हैं।
परंपरा के अनुसार, इस दिन भगवान विश्वकर्मा – जो शिल्प, निर्माण और तकनीक के देवता माने जाते हैं – की पूजा कारखानों, फैक्ट्रियों, दुकानों और दफ्तरों में बड़े धूमधाम से की जाती है।
तीन विशेष संयोग
इंदिरा एकादशी – 17 सितंबर की रात 12:21 बजे से एकादशी तिथि प्रारंभ होकर 18 सितंबर की रात 11:39 बजे तक रहेगी।
सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश – 17 सितंबर को देर रात 01:54 बजे सूर्य देव कन्या राशि में गोचर करेंगे।
विश्वकर्मा पूजा – इस दिन औजारों, मशीनों और वाहनों की विधिवत पूजा होती है।
शुभ मुहूर्त और महापुण्यकाल
महापुण्य काल : सुबह 05:36 से 07:39 बजे तक
पूजा का शुभ समय : प्रातः 7 बजे से रात 8 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त : 11:15 से 12:25 बजे और 1:00 से 2:15 बजे तक
धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि विश्वकर्मा पूजा पर व्रत रखने और पूजा करने से पितरों को शांति मिलती है और व्यक्ति को पितृ ऋण से मुक्ति का मार्ग मिलता है।
इस दिन मशीनों और औजारों की सफाई कर उन पर पुष्प, अक्षत और दीप अर्पित किए जाते हैं। कामकाजी लोग अपने उपकरणों को दिव्य मानकर उनकी पूजा करते हैं और नए कार्यों की शुरुआत करते हैं।
माना जाता है कि ऐसा करने से व्यापार में वृद्धि, कार्य में सफलता और जीवन में समृद्धि आती है। साथ ही, इंदिरा एकादशी पर पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और कन्या संक्रांति पर दान-पुण्य करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
कुल मिलाकर, यह दिन श्रद्धा, सृजन और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है।











