चमोली : उत्तराखंड के चमोली जिले में करनप्रयाग क्षेत्र के सेरागाड़ ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला गुनाड़ गांव इन दिनों सुर्खियों में है। यहां का मुख्य पैदल मार्ग पिछले कई महीनों से पूरी तरह टूटा हुआ है, जिससे ग्रामीणों को हर दिन जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है।
कैसे हुआ रास्ता खराब?
यह समस्या जुलाई महीने से शुरू हुई, जब भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से गांव को जोड़ने वाला यह महत्वपूर्ण पैदल रास्ता बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में ऐसी घटनाएं आम हैं, क्योंकि यहां मानसून के दौरान मिट्टी का कटाव और चट्टानों का गिरना रोज की बात हो जाती है। गुनाड़ गांव का यह रास्ता जंगल के बीच से गुजरता है, जहां खड़ी चट्टानें और गहरी खाइयां हैं।
ग्रामीणों का अस्थायी जुगाड़
रास्ता टूटने के बाद ग्रामीणों ने खुद ही पहल की और टूटे हिस्सों पर लकड़ी के मोटे तख्ते या लॉग बिछाकर एक तरह का अस्थायी पुल बना दिया। अब चार महीने से ज्यादा समय हो चुका है, और गांव के लोग इन्हीं लकड़ियों के सहारे स्कूल जाते हैं, बाजार का सामान लाते हैं या अस्पताल पहुंचते हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग – सभी को इस रास्ते से गुजरना पड़ता है। एक गलत कदम और नीचे गहरी खाई में गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है।
क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधि नंदकिशोर थपलियाल और ग्राम प्रधान नीरज रतूड़ी बताते हैं कि इस रास्ते से फिसलने या गिरने की घटनाएं तो नहीं हुईं, लेकिन डर हर पल सताता है। खासकर बारिश के दिनों में लकड़ियां फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे हादसे की आशंका और बढ़ जाती है।
क्यों देरी हो रही मरम्मत में?
यह रास्ता वन क्षेत्र में आता है, इसलिए इसकी देखभाल और मरम्मत की जिम्मेदारी पूरी तरह वन विभाग की है। उत्तराखंड में जंगल के रास्तों और पैदल पगडंडियों का रखरखाव वन विभाग ही करता है, क्योंकि ये आरक्षित या संरक्षित वन क्षेत्रों में होते हैं। ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें कीं, पत्र लिखे और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन अभी तक कोई ठोस काम नहीं हुआ।
पश्चिमी पिंडर रेंज के रेंजर अखिलेश भट्ट का कहना है कि मरम्मत के लिए अनुमान (एस्टीमेट) तैयार करके उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। जैसे ही बजट और स्वीकृति मिलेगी, काम तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी मरम्मत के लिए फंडिंग और प्रशासनिक प्रक्रिया में समय लगना आम बात है, लेकिन ग्रामीणों के लिए यह इंतजार जानलेवा साबित हो रहा है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में ग्रामीण इलाकों की सड़कें और रास्ते अक्सर प्राकृतिक आपदाओं का शिकार बनते हैं। राज्य में हजारों किलोमीटर पैदल मार्ग हैं जो गांवों को जोड़ते हैं, लेकिन रखरखाव की कमी से कई जगह ऐसी ही समस्याएं बनी रहती हैं। उम्मीद है कि जल्द ही गुनाड़ गांव के इस रास्ते की मरम्मत हो जाए और ग्रामीणों को राहत मिले।







