Tobacco Heart Attack Risk : तंबाकू का इस्तेमाल देश में लंबे समय से एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। बीड़ी, सिगरेट या गुटखा—रूप चाहे कोई भी हो, शरीर के लिए इसका असर हमेशा नुकसानदेह ही माना गया है।
खासकर दिल से जुड़ी बीमारियों पर इसका प्रभाव काफी गहरा होता है। कई लोग तंबाकू को सिर्फ एक आदत या स्ट्रेस कम करने का तरीका समझते हैं, लेकिन यह धीरे-धीरे हार्ट पर ऐसा असर डालता है जो आगे चलकर जानलेवा भी साबित हो सकता है।
स्मोकिंग से क्यों बढ़ जाता है दिल का खतरा
कई मेडिकल रिपोर्ट्स में ये बात साफ सामने आती है कि स्मोकिंग करने वालों में दिल की बीमारियों का खतरा आम लोगों की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है। आंकड़ों के अनुसार, स्मोकिंग करने वालों को हार्ट डिज़ीज़ होने की संभावना 2 से 4 गुना तक बढ़ जाती है।
डॉक्टर्स बताते हैं कि दिल से जुड़ी हर पांच मौतों में करीब एक मौत की वजह स्मोकिंग होती है। सिगरेट में मौजूद केमिकल्स सीधे ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और दिल को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है।
क्या सिर्फ स्मोकिंग ही नुकसान करती है? स्मोकलेस तंबाकू भी उतना ही खतरनाक
लोग अक्सर सोचते हैं कि गुटखा या चबाने वाली तंबाकू धूम्रपान से कम नुकसानदायक है। जबकि सच ये है कि स्मोकलेस तंबाकू भी दिल की गति बढ़ाने, ब्लड प्रेशर ऊंचा करने और हार्ट की धड़कन को असामान्य बनाने में बड़ी भूमिका निभाती है।
नियमित रूप से गुटखा या तंबाकू चबाने से दिल की नसों पर लगातार दबाव बढ़ता है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कई गुना ज्यादा बना देता है।
तंबाकू ब्लड वेसल्स पर क्या असर डालता है
तंबाकू शरीर में ऐसे तत्व छोड़ता है जो ब्लड वेसल्स को संकुचित कर देते हैं। इससे ब्लड फ्लो कम होता है और हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।
धीरे-धीरे यह स्थिति खून के थक्के बनने (Blood Clots) का कारण बनती है, जो दिल के दौरे का सीधा कारण माना जाता है।
इसके साथ ही तंबाकू व्यायाम करने की क्षमता भी कम करता है, जिससे शरीर में थकान और कमजोरी बढ़ने लगती है।
कैसे छोड़ें तंबाकू की आदत — आसान और प्रभावी तरीके
तंबाकू छोड़ना कठिन जरूर लगता है, लेकिन सही विकल्प और थोड़ी हिम्मत से इसे धीरे-धीरे छोड़ा जा सकता है। सबसे बेहतर और आसान तरीका है शुगर-फ्री च्यूइंग गम।
यह आपके मुंह को उतना ही व्यस्त रखती है जितना तंबाकू रखता है, जिससे क्रेविंग कम हो जाती है। स्मोकिंग छोड़ने वालों के लिए निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी, पैचेज और कभी-कभी ई-सिगरेट भी अस्थायी विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं।
हालांकि इनका उपयोग हमेशा किसी एक्सपर्ट या डॉक्टर से सलाह लेकर ही करना बेहतर माना जाता है।











