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2008 का खूंखार आतंकी भी Al Falah University से पढ़ा, अब पाकिस्तान में छिपा

By Rajat Sharma

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Mirza Shadab Beg Al Falah University : दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर एक पुराना और बेहद खतरनाक नाम फिर से उभरकर सामने आ गया है – मिर्जा शादाब बेग। 2008 के कई सीरियल बम धमाकों में मुख्य साजिशकर्ता माने जाने वाले बेग को अब एक बार फिर भारतीय जांच एजेंसियां ढूंढ रही हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि बेग भी हरियाणा के फरीदाबाद वाली अल-फलाह यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट है, जो हालिया ब्लास्ट के आरोपी डॉक्टरों से जुड़ा हुआ संस्थान है।

कौन है मिर्जा शादाब बेग और कहां से आया ये नाम?

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के लालगंज इलाके के बरैदी गांव का रहने वाला बेग अपने परिवार के साथ पहले राजा का किला मोहल्ले में रहता था। शुरुआती पढ़ाई के दौरान उसे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वो 9वीं क्लास में फेल हो गया था।

बाद में बीएससी सब्जेक्ट्स की पढ़ाई की और आखिरकार आजमगढ़ रेलवे स्टेशन के पास चिल्ड्रन स्कूल से 12वीं क्लास पास की। इसके बाद बेग ने फरीदाबाद (हरियाणा) के अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में बीटेक किया और 2007 में इंजीनियरिंग पूरी की।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बेग इंडियन मुजाहिदीन (IM) के आजमगढ़ मॉड्यूल का प्रमुख था। फिलहाल उसके रियाज और यासीन भटकल जैसे संगठन के फाउंडर मेंबर्स के साथ पाकिस्तान में होने की आशंका है। जांच में ये भी पता चला है कि वो कुछ समय सऊदी अरब में भी रहा था।

कैसे युवाओं को बनाया कट्टरपंथी?

पुलिस रिकॉर्ड्स बताते हैं कि बेग ने 2008 में कई युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेला। इसी दौरान उसने अपने चचेरे भाई साकिब निसार समेत कई लड़कों को IM के नेटवर्क से जोड़ा। बेग ने आजमगढ़ के अतीक अमीन ग्रुप और दिल्ली के स्टूडेंट्स ग्रुप को मिलाकर एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, बेग दिल्ली और अहमदाबाद दोनों जगहों की रेकी में एक्टिव रहा और इंडिया गेट पर विस्फोटक लगाने में उसकी डायरेक्ट भूमिका थी। दिल्ली के जाकिर नगर में रहते हुए वो कई मेंबर्स को शरण देता था और जिहादी किताबों से उन्हें ब्रेनवॉश करता था।

बटला हाउस एनकाउंटर में मिला था बड़ा क्लू

बटला हाउस एनकाउंटर के बाद छापों में पुलिस को उसके किराए के कमरे से उसका आईडी कार्ड मिला था। उस ऑपरेशन में चार IM ऑपरेटिव पकड़े गए, लेकिन बेग और उसका साथी मोहम्मद खालिद आज भी फरार हैं।

जांच में पता चला है कि बेग 2008 में कर्नाटक के उडुपी भी गया था, जहां से जयपुर धमाकों के लिए विस्फोटक, डेटोनेटर और बॉल बेयरिंग्स सप्लाई की। वो पुणे की जर्मन बेकरी ब्लास्ट का भी कथित मुख्य साजिशकर्ता था।

2008 के उन खौफनाक धमाकों की याद

  • अहमदाबाद धमाके (2008): 56 लोगों की मौत, 246 घायल
  • दिल्ली धमाके (13 सितंबर 2008): 20 मौतें, 100 से ज्यादा घायल

मोबाइल इंटरसेप्ट्स, दिल्ली-अहमदाबाद से बरामद सामान और घटनास्थल के सबूत बे बेग की भूमिका को पक्का साबित करते हैं। अब दिल्ली कार ब्लास्ट में नए क्लू मिलने से उसका नाम फिर सुर्खियों में है। एजेंसियां जानना चाहती हैं कि क्या उसका पुराना नेटवर्क अभी भी एक्टिव है और हालिया धमाका किसी बड़े मॉड्यूल की शुरुआत तो नहीं।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर गंभीर सवाल

अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर अब आतंकी नेटवर्क से जुड़ने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। हालिया दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी डॉ. उमर नबी, डॉ. मुजम्मिल गनाई और डॉ. शाहीन शाहिद भी इसी यूनिवर्सिटी से MBBS कर चुके हैं। जांच में खुलासा हुआ कि ब्लास्ट से महज 10 दिन पहले उमर नबी ने नूह की हिदायत कॉलोनी में किराए का कमरा लिया था, जिसकी व्यवस्था यूनिवर्सिटी से जुड़े इलेक्ट्रीशियन शोएब ने की थी।

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