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सुप्रीम कोर्ट ने Talaq-e-Hasan प्रथा पर उठाए संवैधानिक सवाल, 5 जजों की पीठ तय

By Rajat Sharma

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Talaq-e-Hasan : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुस्लिम पर्सनल लॉ में प्रचलित तलाक-ए-हसन की प्रथा पर कड़ा सवाल उठाया। जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर एक सभ्य समाज ऐसी प्रथा को कैसे चलने दे सकता है? कोर्ट ने साफ कहा – “ये क्या तरीका है भाई? 2025 में भी आप इसे बढ़ावा दे रहे हैं? महिलाओं की इज्जत कैसे बचेगी?”

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछे तीखे सवाल

बेंच में जस्टिस सूर्यकांत के साथ जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह भी मौजूद थे। कोर्ट ने गुस्से भरे लहजे में कहा, “जब कोई प्रथा पूरे समाज को प्रभावित करती है, तो अदालत को बीच में आना पड़ता है। अगर ये प्रथा घोर भेदभाव वाली है, तो हमें हस्तक्षेप करना ही होगा।”

मामला क्या है?

दिल्ली की पत्रकार बेनाजीर हीना ने जनहित याचिका दायर कर तलाक-ए-हसन को असंवैधानिक बताया है। उनका कहना है कि ये प्रथा बिल्कुल मनमानी और तर्कहीन है, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का खुलेआम उल्लंघन करती है। बेनाजीर का दावा है कि उनके पति ने इसी तरीके से तलाक दिया, लेकिन तकनीकी दांव-पेंच की वजह से वो कागजों में तलाकशुदा साबित नहीं कर पा रही हैं – जबकि पति दूसरी शादी कर चुके हैं।

असली परेशानी स्कूल एडमिशन में आई सामने

बेनाजीर के वकील ने कोर्ट को बताया, “मैडम जब बच्चे का स्कूल में दाखिला कराना चाहा तो हर जगह यही जवाब मिला – तलाक के कागज दिखाओ। मैंने कहा पति आगे बढ़ चुके हैं, दोबारा शादी कर ली, लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं। तकनीकी बातों में फंस गई हूं। दहेज की मांग से शुरू हुआ पूरा मामला।”

तलाक-ए-हसन आखिर है क्या?

इस प्रथा में पति लगातार तीन महीने तक हर महीने “तलाक” शब्द बोलता है। तीसरे महीने तीसरी बार बोलते ही तलाक पूरा मान लिया जाता है – बशर्ते बीच में पति-पत्नी के संबंध फिर से शुरू न हुए हों।

कोर्ट बड़ा कदम उठाने की तैयारी में

सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दे दिया कि मामला गंभीर है और इसे पांच जजों की संवैधानिक बेंच को भेजा जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने दोनों पक्षों को कहा, “आप हमें एक छोटा-सा नोट दे दीजिए कि इस मामले में कौन-कौन से सवाल उठ सकते हैं। फिर हम तय करेंगे कि इसे 5 जजों की बेंच के पास भेजना चाहिए या नहीं।”

अगली सुनवाई अब 26 नवंबर को होगी। देखना ये है कि क्या 2025 में भी तलाक-ए-हसन जैसी प्रथा को सुप्रीम कोर्ट हरी झंडी देगा या हमेशा के लिए खत्म कर देगा?

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