Red Color In Puja : घर में मंदिर सजाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने का तरीका भी है। घर का मंदिर हर सदस्य के लिए शांति और सुख का स्रोत माना जाता है।
इसलिए लोग मंदिर को सुंदर और साफ-सुथरा रखना पसंद करते हैं। पूजा के दौरान थाली, कलश और मूर्ति तक, सब कुछ व्यवस्थित और मनमोहक होना चाहिए।
लाल रंग का मंदिर में महत्व
लाल रंग को भारतीय संस्कृति में ऊर्जा, शक्ति और जोश का प्रतीक माना जाता है। शादी, उत्सव और अन्य धार्मिक अवसरों पर यह रंग खुशी और उत्साह को दर्शाता है।
लेकिन क्या यह घर के मंदिर के लिए भी सही है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लाल रंग बहुत ज्यादा ऊर्जा से भरा होता है और इससे मानसिक बेचैनी और गर्मी बढ़ सकती है।
लाल रंग से ध्यान में बाधा
मंदिर में पूजा का उद्देश्य मन को शांत रखना और ध्यान लगाना होता है। यदि मंदिर में लाल रंग का कपड़ा बिछाया जाए, तो यह मानसिक स्थिरता में बाधा डाल सकता है।
जब मन अशांत रहता है, तो मंत्रों का जाप और पूजा का सही अनुभव संभव नहीं होता। इसलिए घर के मंदिर में लाल रंग का इस्तेमाल हमेशा ही उचित नहीं माना जाता।
हल्के और सौम्य रंगों का महत्व
मंदिर सजाने के लिए हल्के रंग सबसे बेहतर विकल्प हैं। हल्के रंग मन को शांति और संतुलन देते हैं, जिससे पूजा में ध्यान लगाना आसान हो जाता है।
पीला रंग आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाता है और ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। हल्का नीला रंग भी मानसिक शांति और ध्यान के लिए उत्तम माना जाता है।
सही रंग चुनने के फायदे
जब आप हल्के और शांत रंगों का प्रयोग करते हैं, तो पूजा का अनुभव अधिक फलदायी होता है। आपके मंत्रों का असर अधिक गहराई से महसूस किया जा सकता है।
मंदिर का वातावरण सुखद और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। घर के मंदिर को सजाते समय लाल रंग से बचना और हल्के रंगों को प्राथमिकता देना बेहतर होता है।
इससे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि पूजा का फल भी अधिक मिलता है। ध्यान रखें कि मंदिर का उद्देश्य केवल भव्यता नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन है।











