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Puja Mantra : जानिए, क्यों हर पूजा के बाद होती है भगवान से माफी की प्रार्थना

By Rajat Sharma

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Puja Mantra : हिंदू धर्म में पूजा केवल एक रूटीन नहीं है। यह आत्मा और ईश्वर के बीच संवाद का माध्यम है। पूजा की हर क्रिया जैसे प्रार्थना, स्नान, ध्यान, भोग आदि के लिए अलग-अलग मंत्र और विधियां बताई गई हैं।

इनमें से एक विशेष मंत्र है क्षमा याचना मंत्र। कहा जाता है कि पूजा का समापन तभी पूर्ण माना जाता है, जब हम भगवान से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करते हैं।

पूजा में होने वाली सामान्य गलतियां

हमारे द्वारा की जाने वाली पूजा में कई बार अनजाने में गलतियां हो जाती हैं। कभी मंत्र उच्चारण में त्रुटि हो जाती है, कभी विधि पूरी नहीं होती, और कभी ध्यान कहीं और भटक जाता है।

इसलिए पूजा के अंत में भगवान से क्षमा याचना करना आवश्यक माना गया है। यह न केवल धार्मिक नियम है, बल्कि आत्मनिरीक्षण और विनम्रता का प्रतीक भी है।

क्षमा याचना मंत्र और उसका अर्थ

क्षमा याचना के लिए एक विशेष मंत्र है:

“आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्,
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन,
यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे॥”

इसका अर्थ है – “हे प्रभु! मुझे न तो आपको बुलाना आता है, न सही विधि से पूजा करना आता है। मेरी पूजा अधूरी हो सकती है, या मैंने कोई गलती की हो तो कृपया मुझे क्षमा करें। मैं आपका भक्त हूं, फिर भी मेरी भूलों को माफ करें।”

क्षमा याचना का आध्यात्मिक महत्व

पूजा के दौरान या उसके बाद क्षमा याचना करने का उद्देश्य बहुत साफ है। यह हमें याद दिलाता है कि भले ही हम पूरी नीयत से पूजा कर रहे हों, इंसानी भूलें तो होती ही हैं।

भगवान से क्षमा याचना करने से मन हल्का होता है और भक्ति का अनुभव गहरा होता है। जीवन में यही नियम हर जगह लागू होता है। जब भी हमसे कोई गलती हो, चाहे वह किसी इंसान के प्रति हो या भगवान के प्रति, क्षमा मांगना जरूरी है।

यह अहंकार को खत्म करता है, रिश्तों में अपनापन बनाए रखता है और आत्मा को शांति देता है।

भक्ति और मानवता का सच्चा संदेश

पूजा के अंत में भगवान से क्षमा याचना करना केवल धार्मिक नियम नहीं है। यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति विनम्रता, आत्मनिरीक्षण और प्रेम से जुड़ी होती है।

जब हम अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं और क्षमा मांगते हैं, तो न केवल हमारी पूजा स्वीकार होती है, बल्कि हम अपने भीतर भी शांति और संतुलन अनुभव करते हैं।

इस प्रकार, क्षमा याचना पूजा का अनिवार्य हिस्सा है। यह हमारी भक्ति को पूर्ण बनाती है, हमारे मन को शुद्ध करती है और हमें जीवन में सच्चाई और प्रेम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

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