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Pitru Paksha Amavasya 2025 : पितरों को प्रसन्न करने के लिए सर्वपितृ अमावस्या पर करें ये खास उपाय

By Rajat Sharma

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Pitru Paksha Amavasya 2025 : पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या कहलाता है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व माना गया है।

मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध की अपेक्षा करते हैं।

इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, तर्पण, पिंडदान करना और जरूरतमंदों को दान देना बेहद पुण्यकारी माना जाता है।

माना जाता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर-परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।

सर्वपितृ अमावस्या 2025 की तिथि व समय

अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 21 सितम्बर 2025, रात 12:16 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त: 22 सितम्बर 2025, रात 01:23 बजे

श्राद्ध व तर्पण के प्रमुख मुहूर्त:

कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:38 तक

रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:38 से 01:27 तक

अपराह्न काल: दोपहर 01:27 से 03:53 तक

किसका श्राद्ध करें इस दिन?

पितृ पक्ष में आमतौर पर श्राद्ध उसी तिथि पर किया जाता है, जिस दिन पूर्वज का देहावसान हुआ हो।

लेकिन जिन परिवारों को अपने पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, वे अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या पर तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करते हैं।

पितृ दोष से मुक्ति का उपाय

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करना और ब्राह्मणों को भोजन कराना पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है। ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

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