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PCOS Symptoms In Women : लाइफस्टाइल स्ट्रेस बन रहा है महिलाओं में पीसीओएस का बड़ा कारण, जानें कैसे करें मैनेज

By Rajat Sharma

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PCOS Symptoms In Women : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्ट्रेस यानी तनाव हर किसी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।

कभी ऑफिस की डेडलाइन पूरी करने का दबाव, कभी घर-परिवार की जिम्मेदारियां और कभी छोटी-छोटी चीजों जैसे पार्किंग की दिक्कत—हर स्थिति में तनाव हम पर हावी हो जाता है।

यह तनाव अगर लंबे समय तक बना रहे तो सिर्फ मानसिक ही नहीं, शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्ट्रेस रहने से महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) की समस्या बढ़ सकती है।

पीसीओएस में ओवरी का आकार बढ़ जाता है और छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं। इससे मासिक धर्म की अनियमितता, वजन बढ़ना, मुंहासे और कई बार गर्भधारण में कठिनाई जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

क्यों बढ़ जाता है पीसीओएस में स्ट्रेस का असर?

कॉर्टिसोल हार्मोन का असंतुलन: जब हम स्ट्रेस में होते हैं तो शरीर कॉर्टिसोल हार्मोन रिलीज करता है। अगर यह लंबे समय तक बना रहे तो शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ जाती है और पीसीओएस के लक्षण गंभीर हो जाते हैं।

इंसुलिन रेजिस्टेंस: ज्यादा कॉर्टिसोल इंसुलिन को प्रभावित करता है, जिससे महिलाओं में एंड्रोजन हार्मोन (पुरुष हार्मोन) का स्तर बढ़ सकता है। इससे शरीर में हार्मोनल असंतुलन बढ़ जाता है।

फर्टिलिटी पर असर: तनाव ज्यादा होने पर पीसीओएस से जूझ रहीं महिलाओं को प्रेग्नेंसी में मुश्किल हो सकती है।

स्ट्रेस और पीसीओएस का “विकृत चक्र”

कई बार पीसीओएस की वजह से महिला को तनाव होता है और फिर वही तनाव पीसीओएस के लक्षणों को और बिगाड़ देता है। इसे तोड़ना बेहद जरूरी है।

कैसे करें स्ट्रेस और पीसीओएस को कंट्रोल?

स्ट्रेस मैनेजमेंट अपनाएं – ध्यान, प्राणायाम और योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

ट्रिगर को पहचानें – समझें कि कौन-सी स्थिति आपको तनाव देती है और उनसे बचने की कोशिश करें।

सही लाइफस्टाइल – हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम और नींद से हार्मोनल बैलेंस सुधरता है।

थैरेपी और मेडिकेशन – जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवाइयां और काउंसलिंग ली जा सकती है।

निष्कर्ष

तनाव और पीसीओएस एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। अगर महिला स्ट्रेस को कंट्रोल करना सीख ले तो पीसीओएस के लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। छोटी-छोटी आदतों और लाइफस्टाइल चेंज से बड़ी राहत मिल सकती है।

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