Bihar Election AIMIM Impact Akhilesh : बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार का जलवा बरकरार है। एनडीए की धमाकेदार जीत के बाद नए सरकार का गठन हो चुका है। शपथ ग्रहण समारोह धूमधाम से हुआ, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी सहित कई बड़े नेता मंच पर नजर आए। पूरे जोश के साथ नई कैबिनेट ने काम संभाल लिया है। लेकिन इस जीत की गूंज सिर्फ बिहार तक नहीं, पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है, जहां विपक्ष को तगड़ा झटका लगा है।
खासकर बिहार के सीमांचल इलाके में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने कमाल कर दिया। AIMIM ने 5 सीटें जीतकर मुस्लिम विधायकों वाली सबसे बड़ी पार्टी का तमगा हासिल लिया है। ये ट्रेंड समाजवादी पार्टी के बॉस अखिलेश यादव के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है।
AIMIM की 5 सीटें, RJD को महज 25 – मुस्लिम वोटों में बड़ा उलटफेर
ओवैसी की AIMIM को इस बार 5 सीटें मिली हैं, जबकि तेजस्वी यादव की RJD सिर्फ 25 सीटें ही बचा पाई। RJD की इस करारी शिकस्त की बड़ी वजह मुस्लिम वोट बैंक का बंटना माना जा रहा है। कई एनालिस्ट्स कह रहे हैं कि RJD का MY (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक दरक गया है। आंकड़े भी यही बयां कर रहे हैं।
पिछले चुनाव में AIMIM ने सीमांचल में 5 सीटें जीती थीं, लेकिन उसे सिर्फ 1.03% वोट मिले थे। लेकिन 2025 में ये आंकड़ा बढ़कर 1.85% हो गया – यानी करीब-करीब दोगुना! वजह साफ है – मुस्लिम वोटर्स अब सोचने लगे हैं कि जहां यादव कम हैं और वे अपना मनपसंद कैंडिडेट जिता सकते हैं, तो सेक्युलर पार्टियों को वोट देने की मजबूरी क्यों?
अखिलेश यादव के लिए क्यों बज रही है खतरे की घंटी?
अब सवाल ये कि यूपी में अखिलेश यादव को ये बिहार का नतीजा क्यों डरा रहा है? वजह ये कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मुस्लिम आबादी तो खासी है, लेकिन सपा का कोर वोटर यादव वहां कम हैं। पश्चिमी यूपी का बड़ा हिस्सा ऐसा ही है।
साथ ही अखिलेश पर ये भी इल्जाम लग रहा है कि उन्होंने आजम खान का बचाव ठीक से नहीं किया, जिससे मुस्लिमों में नाराजगी है। अगर ये नारेटिव चला और 2027 के यूपी चुनाव में ओवैसी ने कैंडिडेट उतारे, तो अखिलेश की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
पश्चिमी यूपी में बदल सकती है पूरी तस्वीर
पश्चिमी यूपी की बात करें तो गाजियाबाद, नोएडा, हापुड़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल और रामपुर जैसे जिलों में यादवों का प्रभाव कम है। अवध के भी कई इलाकों में यादव भले अच्छे नंबर में हों, लेकिन ठाकुर-ब्राह्मण जैसे BJP सपोर्टर भी मजबूत हैं।
ऐसे में अगर मुस्लिम वोटर्स को लगा कि सपा के बिना भी अपना कैंडिडेट जीता सकते हैं, तो खेल पलट सकता है। 2022 यूपी चुनाव में ओवैसी को यहां सिर्फ 0.49% वोट मिले थे। अगर बिहार जैसा ट्रेंड चला और ये 2% के करीब पहुंच गया, तो पूरी पिक्चर बदल जाएगी।











