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Nitish Kumar Political Journey : लालू से बिछड़े, मोदी से लड़े, फिर मोदी के गले लगे – समझे नीतीश का असली खेल

By Rajat Sharma

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Nitish Kumar Political Journey : बिहार की सियासत में पांच दशकों से ज्यादा समय से सक्रिय नीतीश कुमार ने बार-बार यह साबित कर दिया है कि उन्हें खत्म लिखने वाले हर बार गलत साबित होते हैं। जब भी कोई उन्हें राजनीतिक कब्रिस्तान भेजने की सोचता है, वो चौंकाने वाले अंदाज में वापसी करते हैं और फिर चमकने लगते हैं।

मंडल राजनीति से निकले ज्यादातर नेताओं की तरह वो सिर्फ जाति की राजनीति तक सीमित नहीं रहे। बल्कि शासन सुधार और विकास को सबसे ऊपर रखा। विपक्ष उन्हें अवसरवादी जरूर कहता रहा, लेकिन नीतीश की चतुराई का नतीजा ये है कि आज तक बीजेपी बिहार में अपना मुख्यमंत्री नहीं बना पाई। चाहे 2020 में बीजेपी 89 सीटें जीतकर आई हो और जेडीयू सिर्फ 85 पर सिमटी हो।

लोग उन्हें ‘पलटू राम’ कहकर चिढ़ाते जरूर हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों की वजह से ‘सुशासन बाबू’ की उपाधि भी उन्होंने कमाई है।

2024 लोकसभा चुनाव में नीतीश ने बीजेपी को भी पछाड़ दिया

2024 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने कम सीटें लड़कर भी बीजेपी जितनी ही सीटें जीत लीं। यही वजह रही कि दिल्ली में मोदी सरकार को बचाने के लिए नीतीश कुमार का समर्थन जरूरी हो गया।

इंजीनियरिंग छोड़कर जेपी आंदोलन में कूदे नीतीश

इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी ठुकरा दी और जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में कूद पड़े। लालू प्रसाद यादव और रामविलास पासवान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले, लेकिन चुनावी सफलता काफी देर से मिली। 1985 में हरनौत से पहली बार विधायक बने, 1989 में बारह से लोकसभा पहुंचे। तब तक लालू बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके थे।

लालू से अलग होकर बनाई अपनी पार्टी

लालू से अलगाव के बाद समता पार्टी बनाई, धीरे-धीरे अपना आधार बढ़ाया। बीजेपी से गठबंधन किया और संसद में उनके काम की तारीफ हुई। बाद में समता पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में विलय हो गई और बीजेपी से रिश्ते बने रहे।

2005 में खत्म हुआ लालू-राबड़ी राज

2005 के पहले चुनाव में एनडीए बहुमत से चूक गया और विधानसभा भंग कर दी गई। लेकिन नवंबर में हुए दोबारा चुनाव में जेडीयू-बीजेपी को भारी जीत मिली और 15 साल का लालू-राबड़ी राज खत्म हो गया। मुख्यमंत्री बनते ही नीतीश के पहले 5 साल सबसे शानदार रहे। अपराध पर लगाम, सड़कें-बिजली की बाढ़, अति पिछड़ों और महादलितों के लिए नई योजनाएं, लड़कियों को साइकिल-यूनिफॉर्म जैसी स्कीमों ने उन्हें घर-घर पहुंचा दिया।

पलटी का सिलसिला शुरू

2013 में मोदी को पीएम कैंडिडेट बनाए जाने पर 17 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया। 2014 में हार के बाद इस्तीफा दिया, लेकिन कुछ महीनों में जीतन राम मांझी को हटाकर फिर कुर्सी पर काबिज हो गए। 2015 में लालू-कांग्रेस के साथ महागठबंधन बनाकर जीते, लेकिन 2017 में तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर 24 घंटे में बीजेपी के साथ फिर सरकार बना ली।

2022 में बीजेपी पर पार्टी तोड़ने का आरोप लगाकर फिर महागठबंधन में चले गए और INDIA गठबंधन बनाने के सूत्रधार बने। लेकिन ठीक अपने स्टाइल में 2024 आते-आते INDIA छोड़कर फिर एनडीए में वापसी कर ली। बीजेपी ने फिर खुले हाथों से स्वागत किया।

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