PM Kisan : दुनिया की सबसे बड़ी किसान सहायता योजना PM-KISAN की 21वीं किस्त यानी 19 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में रिलीज कर दी। करीब 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के खातों में 2000 रुपये की ये किस्त ट्रांसफर हो गई है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहले ही कन्फर्म कर दिया था कि PM-KISAN की ये किस्त पूरे देश के पात्र किसानों को मिलेगी। इसी मौके पर पीएम मोदी ने दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन 2025 का उद्घाटन किया और वहां से PM-KISAN की राशि का डिजिटल ट्रांसफर किया।
प्रधानमंत्री आज तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के एक दिन के दौरे पर हैं। सबसे खास बात ये है कि PM-KISAN की अपडेटेड लिस्ट से करीब 70 लाख किसानों के नाम हटा दिए गए हैं। आखिर ऐसा क्यों हुआ? चलिए आपको विस्तार से बताते हैं।
आंध्र प्रदेश के बाद कोयंबटूर का दौरा
पीएम मोदी सबसे पहले आंध्र प्रदेश पहुंचे, जहां पुट्टपर्थी में आध्यात्मिक गुरु भगवान श्री सत्य साईं बाबा के जन्म शताब्दी समारोह में शामिल हुए। उसके बाद वे कोयंबटूर पहुंचे और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले बड़े किसान सम्मेलन को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में 50 हजार से ज्यादा किसान मौजूद रहे। ये आयोजन तमिलनाडु प्राकृतिक कृषि हितधारक मंच ने किया था।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस शिखर सम्मेलन का मकसद टिकाऊ, पर्यावरण के अनुकूल और केमिकल-फ्री खेती को प्रमोट करना है। साथ ही भारत की कृषि को जलवायु-अनुकूल और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्राकृतिक खेती की तरफ तेजी से शिफ्ट करना है। PM-KISAN जैसी योजनाएं इसी विजन को सपोर्ट करती हैं।
PM-KISAN से कैसे मिलता है फायदा?
PM-KISAN योजना के तहत केंद्र सरकार हर साल किसानों को 6000 रुपये की मदद देती है। ये पैसे हर चार महीने में 2000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में आते हैं। योजना 24 फरवरी 2019 को शुरू हुई थी। पिछली किस्त में 9.7 करोड़ से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ था। अब PM-KISAN की 21वीं किस्त में ये संख्या घटकर करीब 9 करोड़ रह गई है।
इस बार 70 लाख लाभार्थी क्यों कम हुए?
PM-KISAN की 21वीं किस्त में पात्र किसानों की संख्या में करीब 70 लाख की कमी आई है। वजह है सरकार का सख्त अभियान, जिसमें अपात्र लोगों को हटाया जा रहा है। हजारों किसानों के रजिस्ट्रेशन और अकाउंट होल्ड पर डाल दिए गए हैं।
मंत्रालय को शक है कि कई लोग PM-KISAN के नियमों को पूरा नहीं करते।
साथ ही कृषि मंत्रालय पूरे देश में ‘सैचुरेशन कैंपेन’ चला रहा है ताकि हर पात्र किसान PM-KISAN में शामिल हो जाए। PM-KISAN पोर्टल पर नोटिस भी जारी हुआ है कि कुछ संदिग्ध केस मिले हैं जो योजना के एक्सक्लूजन क्राइटेरिया में आते हैं। किसानों से कहा गया है कि वे वेबसाइट पर अपनी एलिजिबिलिटी जरूर चेक करें।
PM-KISAN का लाभ कौन नहीं ले सकता?
PM-KISAN के नियमों के अनुसार राज्य सरकारें लाभार्थियों की पहचान करती हैं। कोई भी जमीन मालिक किसान परिवार योजना में आ सकता है, बशर्ते वो एक्सक्लूजन क्राइटेरिया में न आए। इसमें शामिल हैं – आयकर देने वाले किसान, सरकारी नौकरी करने वाले, चुने हुए जनप्रतिनिधि और 10,000 रुपये या उससे ज्यादा मासिक पेंशन पाने वाले लोग।
सरकार का मकसद सिर्फ ये है कि PM-KISAN का पैसा सही और पात्र किसानों तक पहुंचे, कोई गलत भुगतान न हो। PM-KISAN अब तक की सबसे पारदर्शी योजनाओं में से एक बन चुकी है।











