Jivitputrika Vrat Puja Vidhi : शनिवार को नहाय-खाय के साथ जिउतिया व्रत (जीवित पुत्रिका) का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर महिलाओं ने सुबह-सुबह नदी, तालाब और पोखरों में स्नान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
कई महिलाएं सूर्यकुंड पहुंचीं और वहां स्नान कर भगवान सूर्य की आराधना की। जिउतिया व्रत माताओं द्वारा संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए किया जाता है।
इस दौरान व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और प्रदोष काल में श्रद्धा के साथ राजा जीमूतवाहन की पूजा करती हैं।
पूजा-पाठ के बाद महिलाएं कथा श्रवण कर अपनी संतान के मंगल की प्रार्थना करती हैं।
कब होगा व्रत का पारण?
अष्टमी तिथि 14 सितंबर की सुबह 8:41 से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 6:27 तक रहेगी।
पंचांग के हिसाब से सोमवार की सुबह 6:30 बजे के बाद ही व्रत का पारण श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन व्रती महिलाएं उपवास तोड़कर फलाहार करती हैं।
पूजा की विशेषताएं
इस व्रत में माताएं जीमूतवाहन और चिल्लो सियारो की पूजा करती हैं। परंपरा के अनुसार, महिलाएं सोने के आठ दांत वाले ‘जितिया धागा’ धारण करती हैं।
इसके अलावा रेशम के धागे से बनी जितिया भी पहनकर माताएं व्रत करती हैं











