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Jitiya Vrat Puja Vidhi 2025 : संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला जितिया व्रत ,जानें शुभ मुहूर्त व तिथि

By Rajat Sharma

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Jitiya Vrat Puja Vidhi 2025 : हिंदू धर्म में जितिया व्रत का बहुत महत्व है। यह व्रत खासतौर पर माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं।

पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान पर आने वाले संकट दूर हो जाते हैं और जीवन में खुशहाली बनी रहती है।

जितिया व्रत 2025 कब है?

इस साल जितिया व्रत 14 सितंबर 2025, रविवार को रखा जाएगा। यह व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है, जिसे श्राद्ध पक्ष की अष्टमी भी कहा जाता है।

अष्टमी तिथि की शुरुआत: सुबह 03:06 बजे

अष्टमी तिथि का समापन: अगले दिन तक रहेगा

इस साल व्रत के दिन रोहिणी नक्षत्र सुबह 8:41 तक रहेगा, उसके बाद मृगशीर्षा नक्षत्र लगेगा।

साथ ही सिद्धि योग और वज्र योग भी बन रहे हैं, जिससे व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।

व्रत का महत्व

जितिया व्रत में माताएं निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान श्रीकृष्ण के साथ राजा जीमूतवाहन की पूजा करती हैं।

मान्यता है कि इस व्रत को करने से बच्चे पर आने वाला हर संकट टल जाता है और उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। इसके अलावा इस व्रत का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से भी है।

महाभारत काल में अश्वत्थामा ने जब उत्तरा की अजन्मी संतान को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुण्यबल से उस गर्भस्थ शिशु को पुनः जीवन दिया।

यही बालक आगे चलकर राजा परीक्षित कहलाया। गर्भ में मृत होकर जीवित होने की वजह से ही उसका नाम पड़ा जीवित्पुत्रिका, और उसी से यह व्रत प्रसिद्ध हुआ।

व्रत की विधि

व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

संकल्प लेकर निर्जला उपवास करें।

भगवान श्रीकृष्ण और जीमूतवाहन की पूजा करें।

व्रत कथा को सुनना या पढ़ना विशेष फलदायी माना जाता है।

अगले दिन व्रत का समापन करें और फलाहार ग्रहण करें।

कहां मनाया जाता है?

यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

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