देश विदेश क्राइम उत्तराखंड मनोरंजन बिज़नेस ऑटो टेक्नोलॉजी खेल धर्म हेल्थ लाइफस्टाइल ई - पेपर

India-Pakistan War 2002 : सीआईए अधिकारी का खुलासा, 2002 में भारत-पाक युद्ध बस होने ही वाला था

By Rajat Sharma

Published on:


India-Pakistan War 2002 : अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाकू ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने सबको चौंका दिया है। उन्होंने बताया कि 2001 में भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान 2002 में युद्ध के बेहद करीब पहुंच गए थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि अमेरिका ने अपने अधिकारियों के परिवारों को पाकिस्तान से निकाल लिया था।

न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में किरियाकू ने कहा, “हमें लग रहा था कि भारत और पाकिस्तान युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं। इस्लामाबाद से अमेरिकी परिवारों को हटाया गया था। उस समय अमेरिकी डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच दौड़ रहे थे ताकि तनाव को कम किया जा सके।” बता दें कि किरियाकू उस समय 9/11 हमले के बाद पाकिस्तान में CIA की आतंकवाद-रोधी कार्रवाइयों की कमान संभाल रहे थे।

अमेरिका का ध्यान था कहीं और

किरियाकू ने खुलासा किया कि उस समय अमेरिका का पूरा फोकस अल-कायदा और अफगानिस्तान पर था। इस वजह से भारत की सुरक्षा चिंताओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “हम इतने व्यस्त थे कि भारत के बारे में दो बार सोचा भी नहीं।” लेकिन 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने सही अनुमान लगाया था कि इसके पीछे पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी आतंकी संगठन थे।

किरियाकू ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इसमें अल-कायदा का हाथ था। यह पाकिस्तान समर्थित कश्मीरी आतंकी समूहों का काम था, और बाद में यह सच भी साबित हुआ।” उन्होंने पाकिस्तान की ‘दोहरी नीति’ और दुनिया की चुप्पी को समस्या की जड़ बताया। उनके मुताबिक, “पाकिस्तान भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा था, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप था।”

भारत का धैर्य, अब ताकत

किरियाकू ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि संसद हमले और मुंबई हमले के बाद भारत ने जबरदस्त संयम दिखाया। लेकिन अब वक्त बदल चुका है। उन्होंने कहा, “भारत अब उस स्थिति में नहीं है कि उसका धैर्य कमजोरी समझा जाए।” किरियाकू ने चेतावनी दी कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच पारंपरिक युद्ध हुआ, तो पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “मैं परमाणु युद्ध की बात नहीं कर रहा, सिर्फ पारंपरिक युद्ध की। पाकिस्तान की सैन्य ताकत भारत के सामने कमजोर है। पाकिस्तान को उकसाने से कोई फायदा नहीं, वे हार जाएंगे।”

भारत की सख्त जवाबी कार्रवाइयां

किरियाकू ने भारत की आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों की तारीफ की। उन्होंने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक और 2025 के ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। उनके मुताबिक, “भारत ने बार-बार दिखाया है कि वह न तो परमाणु धमकियों को बर्दाश्त करेगा और न ही सीमा पार आतंकवाद को।” किरियाकू ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के दो चेहरों का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया, “ISI का एक हिस्सा ब्रिटेन के सैंडहर्स्ट और अमेरिका के FBI से प्रशिक्षित था, जबकि दूसरा हिस्सा जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को पाल रहा था।”

पाकिस्तान में आतंक का सबूत

किरियाकू ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 2002 में लाहौर में एक रेड के दौरान तीन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को पकड़ा गया। उनके पास अल-कायदा का ट्रेनिंग मैनुअल मिला। उन्होंने कहा, “यह पहली बार था जब हमें पाकिस्तान सरकार और अल-कायदा के बीच संबंध का ठोस सबूत मिला।”

कौन हैं जॉन किरियाकू?

जॉन किरियाकू ने CIA में 15 साल तक अपनी सेवाएं दीं। पहले वे एनालिस्ट थे, फिर पाकिस्तान में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन्स के प्रमुख बने। उन्होंने पेशावर, कराची, लाहौर, फैसलाबाद और क्वेटा में अल-कायदा के नेटवर्क को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई। 2007 में उन्होंने खुलासा किया कि CIA ने कैदियों से पूछताछ में वाटरबोर्डिंग जैसी यातनाओं का इस्तेमाल किया था। इसके लिए उन्हें 23 महीने की सजा हुई, लेकिन किरियाकू आज भी कहते हैं, “मुझे कोई पछतावा नहीं, कोई अफसोस नहीं।”

Leave a Comment