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Hormonal Imbalance : क्या आपकी कब्ज की समस्या हार्मोनल इंबैलेंस का संकेत है, जानें साइंस क्या कहता है

By Rajat Sharma

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Hormonal Imbalance : कब्ज केवल पाचन से जुड़ी समस्या नहीं है। यह हमारे हार्मोनल सिस्टम पर भी असर डाल सकती है। खासकर महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है।

प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज़ या 30 की उम्र के बाद महिलाओं में कब्ज की समस्या आम है। यदि कब्ज लंबे समय तक बनी रहती है और क्रॉनिक हो जाती है, तो यह हार्मोनल असंतुलन यानी हार्मोनल इंबैलेंस को जन्म दे सकती है।

कब्ज और हार्मोनल असंतुलन का संबंध

कब्ज और हार्मोनल असंतुलन के बीच संबंध पर अभी शोध सीमित हैं, लेकिन मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट के अनुसार हाई एस्ट्रोजन लेवल डायरेक्ट या इंडायरेक्ट रूप से कब्ज का कारण बन सकता है।

एस्ट्रोजन हमारे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक (GI Tract) यानी पाचन तंत्र को रेगुलेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। GI ट्रैक हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम का अहम हिस्सा है, जिसमें स्टमक और इंटेस्टाइन शामिल हैं।

यह वेस्ट मैटेरियल को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। जब कब्ज होता है, तो स्टूल पास होने में कठिनाई होती है और हाई एस्ट्रोजन लेवल GI ट्रैक को धीमा कर देता है।

2019 की एक स्टडी में यह भी पाया गया कि एस्ट्रोजन और स्ट्रेस आपस में जुड़े हुए हैं, जो ब्रेन और गट दोनों पर प्रभाव डालते हैं।

कैसे हाई एस्ट्रोजन कब्ज पैदा करता है?

जब शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा ज्यादा होती है, तो कोलन मसल्स हार्ड हो जाती हैं और पेल्विक मसल्स कमजोर होने लगती हैं। इससे GI ट्रैक के माध्यम से वेस्ट मैटेरियल को बाहर निकालने में समय लगता है और कब्ज बढ़ जाती है।

कब्ज और हार्मोनल असंतुलन से निपटने के उपाय

कब्ज और हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या को हल करने के लिए हार्मोन को संतुलित करना जरूरी है। इसके लिए कुछ घरेलू और प्राकृतिक उपाय मददगार साबित होते हैं:

प्रोबायोटिक्स युक्त फूड का सेवन

दही, केफिर, किमची और अन्य प्रोबायोटिक फूड बाउल मूवमेंट को रेगुलर रखने में मदद करते हैं। ये गुड बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और हार्मोन संतुलन में योगदान देते हैं।

हल्दी का इस्तेमाल

हल्दी में करक्यूमिन नामक सक्रिय तत्व होता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन कम करने में मदद करता है। इससे बाउल मूवमेंट आसान होता है और कब्ज की समस्या कम होती है।

क्रूसिफेरस सब्जियों का सेवन

ब्रोकली, काले, फूलगोभी जैसी सब्जियां एस्ट्रोजन के लोड को कम करने में मदद करती हैं। इसके नियमित सेवन से पाचन प्रणाली बेहतर रहती है और कब्ज कम होती है।

कब्ज केवल पेट की समस्या नहीं है, बल्कि यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत भी हो सकता है। प्रोबायोटिक फूड, हल्दी और क्रूसिफेरस सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करके आप कब्ज और हार्मोनल इंबैलेंस दोनों से राहत पा सकते हैं।

नियमित पाचन और सही जीवनशैली से यह समस्या काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती है।

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