Health Tips : अक्सर हम यह सोचते हैं कि उंगलियां चटकाना सिर्फ एक आम आदत है, लेकिन क्या ये हमारी सेहत पर असर डाल सकती है?
खासकर बुढ़ापे में हाथों और जोड़ों में दर्द या गठिया जैसी परेशानियों से जुड़ी बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं। आइए जानते हैं कि डॉक्टर्स और रिसर्च इस बारे में क्या कहते हैं।
उंगलियां चटकाने की वैज्ञानिक वजह
जब हम अपनी उंगलियों को खींचते हैं और चटकाते हैं, तो जोड़ों के बीच मौजूद लिक्विड में प्रेशर कम हो जाता है। इस लिक्विड में घुली हुई गैसों के बुलबुले बन जाते हैं।
जैसे ही हम उंगलियों पर दबाव डालते हैं, ये बुलबुले फटते हैं और “क्रैक” की आवाज आती है। इस पूरी प्रक्रिया को साइंस में कैविटेशन (Cavitation) कहते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस लिक्विड में गैस को दोबारा घुलने में कम से कम आधा घंटा लगता है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपने अभी उंगलियां चटकाई हैं, तो अगले आधे घंटे तक दोबारा चटकाना मुश्किल होगा।
बार-बार उंगलियां चटकाने से क्या हो सकता है?
हालांकि गठिया का खतरा नहीं बढ़ता, लेकिन अत्यधिक आदत से कुछ मामूली परेशानियां हो सकती हैं:
जोड़ों में हल्की सूजन या दर्द महसूस होना
हाथों की पकड़ कमजोर होना
मानसिक रूप से आदत बन जाना, जो कभी-कभी अनिद्रा या तनाव जैसी समस्याओं से जुड़ सकती है
इसलिए अगर आपको लगता है कि उंगलियां चटकाने की आदत मानसिक रूप ले रही है, तो डॉक्टर या थेरेपिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।
क्या रोकने की जरूरत है?
यदि यह आदत केवल मनोरंजन या तनाव कम करने के लिए है, तो इसे रोकने की आवश्यकता नहीं। बस ध्यान रखें कि लगातार अत्यधिक दबाव डालने से हाथों और जोड़ों पर असुविधा हो सकती है।
उंगलियां चटकाने से गठिया या आर्थराइटिस नहीं होता, लेकिन हल्की सूजन या मानसिक आदत बन जाने की संभावना है। इसे नियंत्रण में रखना या जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।











