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Ganesh Chaturthi Puja Rules : पूजा में इन गलतियों से बचें, तभी मिलेगा श्रीगणेश का आशीर्वाद

By Rajat Sharma

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Ganesh Chaturthi Puja Rules : गणेश चतुर्थी का त्योहार केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं बल्कि घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाने का अवसर भी होता है।

लेकिन कई बार हम अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। आइए जानते हैं गणेश चतुर्थी पर किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए—

गणेश जी की मूर्ति किस दिशा में रखें

वास्तु शास्त्र के अनुसार, गणेश जी की मूर्ति को उत्तर या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है। दक्षिण दिशा में मूर्ति रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

सही दिशा में मूर्ति रखने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

टूटी-फूटी मूर्ति का प्रयोग न करें

यदि गणेश जी की मूर्ति टूटी या खंडित हो तो उसकी पूजा करना अशुभ माना जाता है। ऐसी मूर्तियां नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं।

हमेशा सुंदर और पूर्ण मूर्ति का ही चयन करें और स्थापना से पहले ध्यान से जांच लें।

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचें

पौराणिक कथा के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखना वर्जित है। मान्यता है कि इससे मिथ्या दोष लगता है।

अगर भूलवश चंद्रमा दिख जाए, तो “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जप करने से दोष का निवारण होता है।

भोग में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं

गणपति को तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, लहसुन और प्याज बिल्कुल न चढ़ाएं। गणेश जी को मोदक, लड्डू, फल और नारियल अत्यंत प्रिय हैं।

पूजा में तुलसी पत्र का उपयोग भी वर्जित है। सात्विक भोग से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

पूजा स्थल की सफाई का महत्व

पूजा स्थल हमेशा स्वच्छ और सुव्यवस्थित होना चाहिए। मूर्ति स्थापना से पहले स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।

फूल, दीपक और धूपबत्ती का सही ढंग से प्रयोग करने से पूजा का प्रभाव और बढ़ जाता है।

शयनकक्ष में मूर्ति न रखें

गणेश जी की मूर्ति को कभी भी शयनकक्ष (Bedroom) में स्थापित न करें। ऐसा करने से मानसिक तनाव और अशांति बढ़ सकती है।

मूर्ति को पूजा घर, ड्रॉइंग रूम या मुख्य द्वार के पास रखना सबसे अच्छा माना जाता है।

शुभ मुहूर्त में करें स्थापना

गणेश चतुर्थी पर पूजा और मूर्ति स्थापना हमेशा सुबह या पंचांग अनुसार तय शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए। रात के समय मूर्ति स्थापना करना अशुभ माना जाता है।

शुभ मुहूर्त में पूजा करने से गणपति की कृपा और सभी कार्यों में सफलता मिलती है।

मूर्ति का सम्मानजनक विसर्जन करें

गणेश चतुर्थी के बाद मूर्ति का विसर्जन हमेशा सम्मानपूर्वक करना चाहिए। मूर्ति को कभी भी गंदे पानी या कूड़ेदान में न फेंकें।

नदी, समुद्र या मंदिर में विसर्जन करना शुभ होता है। विसर्जन के समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जप करने से पूजा का पूरा फल मिलता है।

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