- देहरादून के डायग्नोस्टिक सेंटरों के लिए नए मानक तय, पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए प्रदूषण बोर्ड की एनओसी अनिवार्य
देहरादून (ब्यूरो)। उत्तराखंड की राजधानी में अब बिना कड़े सुरक्षा मानकों के अल्ट्रासाउंड और रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों का संचालन मुमकिन नहीं होगा। जिलाधिकारी सविन बंसल ने जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिले के सभी प्रस्तावित और वर्तमान सेंटरों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण के लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब केवल उन्हीं सेंटरों को काम करने की इजाजत मिलेगी जो मानकों की कसौटी पर 100 फीसदी खरे उतरेंगे। जिलाधिकारी ने पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) एक्ट और क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

पिछले छह महीनों से जिला प्रशासन सक्रियता से उन केंद्रों की छंटनी कर रहा है जो नियमों की अनदेखी कर रहे थे। नए नियमों के तहत अब बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना अनिवार्य है, ताकि अस्पतालों से निकलने वाले कचरे का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
जांच के दौरान अब भवन की संरचनात्मक सुरक्षा (बिल्डिंग सेफ्टी) और अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) के प्रमाण पत्रों को अनिवार्य रूप से देखा जाएगा। यदि किसी केंद्र के पास पुख्ता फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं है या बिल्डिंग का नक्शा मानकों के अनुरूप नहीं है, तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी (NOC) को भी अनिवार्य सूची में डाल दिया है। स्वच्छता और सफाई व्यवस्था की अनदेखी करने वाले अस्पतालों और क्लीनिकों को तत्काल प्रभाव से सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
संबंधित अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे आवेदनों की गहन जांच करें। किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर या नियमों में ढील देने पर संबंधित अधिकारी की भी जवाबदेही तय की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की जान से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह कदम देहरादून में लगातार बढ़ती निजी क्लीनिकों की संख्या और उनमें सुरक्षा मानकों की कमी को देखते हुए उठाया गया है। प्रशासन का मुख्य फोकस यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में इन सेंटरों के भीतर मरीजों के लिए पर्याप्त निकासी और सुरक्षा इंतजाम मौजूद हों।






