देहरादून : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस की दिल्ली में हुई रैली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद पर लगे वोट चोरी के पुराने आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है, जबकि जनता ने 2014 से ही उन्हें सत्ता से बाहर रखा है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर में मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी अनियमितताओं पर बहस छिड़ी हुई है। भट्ट की टिप्पणी ने उत्तराखंड की राजनीति में नई हलचल मचा दी है, जहां विकास के मुद्दे पर भाजपा मजबूत स्थिति में दिख रही है।
कांग्रेस की रैली का पृष्ठभूमि और उद्देश्य
कांग्रेस ने हाल ही में दिल्ली में एक बड़ी रैली आयोजित की, जहां उन्होंने केंद्र सरकार पर वोट चोरी के आरोप लगाए। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया पर केंद्रित था, जिसके तहत मतदाता सूची में सुधार किए जाते हैं। कांग्रेस का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए लाखों वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं, जो विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचा रहा है।
हाल के चुनावों में, जैसे हरियाणा और महाराष्ट्र में, कांग्रेस ने इसी मुद्दे को उठाया था, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी रैलियां चुनावी मौसम में पार्टियों की रणनीति का हिस्सा होती हैं, जहां पुराने विवादों को नए रंग में पेश किया जाता है।
भाजपा का जवाब: ऐतिहासिक आरोपों का जिक्र
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस की इस रैली को उनके युवा नेता को बचाने की कोशिश बताया। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस की सरकारों में ही मतदाता सूची में कई बार सुधार हुए हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 1950 से अब तक मतदाता सूची की रिवीजन प्रक्रिया कई चरणों में हुई है, और कांग्रेस के शासनकाल में कम से कम 8 बार एसआईआर जैसी प्रक्रियाएं चलीं।
भट्ट ने कहा कि तकनीकी सुधारों के साथ जैसे-जैसे चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी हुई, कांग्रेस का बहुमत कम होता गया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत को उन्होंने जनता का फैसला बताया, जहां वोट चोरी जैसे आरोपों ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया। यह दावा चुनाव आयोग की रिपोर्ट्स से मेल खाता है, जो दिखाती हैं कि डिजिटल और आधार-लिंक्ड वोटर आईडी ने धांधली को काफी हद तक रोका है।
सोनिया गांधी पर लगा आरोप: पुराना विवाद नई सुनवाई
भट्ट ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने 1983 के एक मामले का हवाला दिया, जहां सोनिया गांधी पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही मतदाता सूची में नाम दर्ज कराकर वोट डाला। हाल ही में, 9 दिसंबर 2025 को दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले में सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता सबित पात्रा ने दावा किया है कि यह फॉर्जरी का केस है, क्योंकि सोनिया 1983 में नागरिक बनीं, लेकिन उससे पहले वोटर लिस्ट में नाम था। अदालत ने अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 तय की है। यह विवाद कांग्रेस के लिए असहज है, क्योंकि यह चुनावी नैतिकता पर सवाल उठाता है। इतिहासकारों के अनुसार, ऐसे मामले राजनीतिक दलों में आम हैं, लेकिन वे जनता की नजर में छवि प्रभावित करते हैं।
कांग्रेस पर घुसपैठियों और फर्जी वोटरों के आरोप
भट्ट ने आगे कहा कि कांग्रेस के नेता फर्जी वोटर कार्ड बनाने में पकड़े जाते हैं और मतदाता सूची में घुसपैठियों को शामिल करने की पैरवी करते हैं। हाल के चुनावों में, जैसे बिहार 2025 में, कांग्रेस ने वोट चोरी के आरोप लगाए, लेकिन चुनाव आयोग ने इन्हें खारिज कर दिया।
राहुल गांधी ने नवंबर 2025 में हरियाणा चुनाव में 5 लाख से ज्यादा डुप्लीकेट वोटरों का दावा किया था, जिस पर ईसीआई ने सफाई दी कि डीडुप्लिकेशन सॉफ्टवेयर से ऐसी गड़बड़ियां रोकी जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी ईसीआई ने माना कि उनका सॉफ्टवेयर पूरी तरह प्रभावी नहीं था, लेकिन सुधार जारी हैं। ये आरोप-प्रत्यारोप भारतीय चुनाव व्यवस्था की मजबूती पर बहस छेड़ते हैं, जहां 97 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं और हर चुनाव में करोड़ों नामों की जांच होती है।
उत्तराखंड की जनता का रुख और विकास की दिशा
अंत में, भट्ट ने कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं के प्रति सहानुभूति जताई, लेकिन कहा कि वे अपने नेता की गलतफहमियों को बनाए रखने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने जोर दिया कि उत्तराखंड की जनता विकास के पथ पर है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तराखंड की जीडीपी ग्रोथ 7.5% के आसपास है, और पर्यटन व इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा है। जनता भाजपा के साथ खड़ी है, क्योंकि वे झूठ और भ्रम की राजनीति से ऊब चुकी है। यह बयान दिखाता है कि चुनावी मुद्दों के बीच विकास कैसे मुख्य एजेंडा बन रहा है।







