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Chakrata Temple Violence : नौ साल बाद तरुण विजय अदालत में दर्ज कराएंगे बयान

By Rajat Sharma

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Chakrata Temple Violence : उत्तराखंड के चकराता इलाके में स्थित सिलगुर देवता मंदिर में नौ साल पहले हुई हिंसा की घटना अब फिर से सुर्खियों में है। इस मामले में अदालत ने पूर्व सांसद तरुण विजय को 19 दिसंबर को जिला अदालत में पेश होकर अपना बयान दर्ज कराने का आदेश दिया है। यह घटना सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव के मुद्दों को उजागर करती है, जो आज भी भारतीय समाज में गहरे पैठे हुए हैं।

घटना का पृष्ठभूमि और विवरण

चकराता, जो देहरादून से करीब 100 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी क्षेत्र है, वहां सिलगुर देवता मंदिर सदियों से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। लेकिन 20 मई 2016 को यहां एक दुखद घटना घटी, जब तरुण विजय, जो उस समय राज्यसभा सांसद थे, कुछ दलित समुदाय के लोगों के साथ मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे।

स्थानीय पुजारियों और कुछ लोगों ने इसे प्रतिबंधित मानते हुए विरोध किया, जिसके चलते पत्थरबाजी हो गई। तरुण विजय को गंभीर चोटें आईं और यहां तक कि उनकी मदद के लिए आई एंबुलेंस को भी वापस भेज दिया गया। इस घटना ने पूरे देश में हलचल मचा दी थी, क्योंकि यह हिंदू समाज में जातिवाद की जड़ों को उजागर कर रही थी।

भारत में मंदिरों में प्रवेश के मुद्दे इतिहास से जुड़े हैं। स्वतंत्रता के बाद भी कई जगहों पर दलितों को मंदिरों में जाने से रोका जाता रहा है, हालांकि संविधान समानता का अधिकार देता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट्स में जातिगत हिंसा के हजारों मामले हर साल दर्ज होते हैं, जो समाज में बदलाव की जरूरत को दर्शाते हैं। इस घटना ने ऐसे मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी थी।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने तरुण विजय का साथ दिया। तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह से लेकर आरएसएस के वरिष्ठ नेता भैयाजी जोशी, कांग्रेस के सचिन पायलट, बसपा प्रमुख मायावती और दलित नेता रामविलास पासवान तक ने इसकी निंदा की और समर्थन जताया। यह एकता दुर्लभ थी, क्योंकि आमतौर पर जातिगत मुद्दों पर राजनीति विभाजित रहती है।

राज्यपाल केके पॉल ने घायल तरुण को अस्पताल पहुंचाने के लिए विशेष हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की, जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत खुद अस्पताल जाकर उनसे मिले और पूरे मामले की जांच का ऐलान किया। इन कदमों से पता चलता है कि घटना कितनी गंभीर थी और इसने सामाजिक न्याय की मांग को मजबूत किया।

तरुण विजय का नजरिया और व्यापक संदेश

अदालती कार्रवाई से पहले तरुण विजय ने अपनी राय साझा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि हिंदू समाज की एकता और जातिवाद से मुक्ति का बड़ा सवाल है। उनके मुताबिक, ऊंची जातियों का गलत अहंकार पूरे समुदाय को कमजोर कर रहा है। तरुण का कहना है कि उनका कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है, बल्कि उनका लक्ष्य समाज को जाति के बंधनों से आजाद कर समानता की भावना पैदा करना है।

यह सोच महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर जैसे नेताओं की शिक्षाओं से प्रेरित लगती है, जो जातिवाद को समाज का सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे। आज के दौर में, जब भारत डिजिटल और आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है, ऐसे मुद्दे हमें याद दिलाते हैं कि सामाजिक सुधार अभी भी जरूरी हैं।

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