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Uttarakhand Voter List Revision : ब्लॉक लेवल एजेंट नियुक्ति में कांग्रेस पीछे, भाजपा ने साधा निशाना

By Rajat Sharma

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Uttarakhand Voter List Revision : उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरों पर है, और इस बीच मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने के लिए विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) का काम चल रहा है। देश भर में कांग्रेस पार्टी चुनावों में डुप्लीकेट या फर्जी वोटिंग को रोकने के लिए लगातार आवाज उठाती रही है, लेकिन यहां राज्य स्तर पर वह खुद इस प्रक्रिया में सक्रियता दिखाने में पीछे नजर आ रही है।

हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि प्रदेश के करीब 11 हजार बूथों पर ब्लॉक स्तर के एजेंटों की नियुक्ति अभी अधर में लटकी हुई है, जो चुनावी पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम है।

ब्लॉक स्तर के एजेंट क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण?

चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने के लिए निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों को मतदाता सूची के संशोधन में शामिल करता है। ब्लॉक लेवल एजेंट (बीएलए) इसी का हिस्सा हैं। बीएलए-1 विधानसभा स्तर पर काम करते हैं, जबकि बीएलए-2 बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच और सुधार में मदद करते हैं।

ये एजेंट सुनिश्चित करते हैं कि कोई फर्जी नाम न जुड़े या कोई वैध मतदाता न छूटे। उत्तराखंड में छह राष्ट्रीय पार्टियां- आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, इंडियन नेशनल कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, सीपीआई (एम) और एनसीपी- को इन एजेंटों की नियुक्ति करनी है। हालांकि, क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल इस सूची में शामिल नहीं है।

आंकड़ों में क्या कहानी छिपी है?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के ताजा डेटा के मुताबिक, राज्य के 11,733 बूथों पर सभी दलों ने मिलकर अब तक सिर्फ 4,155 बीएलए-2 नियुक्त किए हैं। इसमें भाजपा ने 2,836 और कांग्रेस ने 1,259 एजेंट तैनात किए हैं। यह संख्या पूरे देश में सबसे कम है, जहां उत्तराखंड और पंजाब सबसे पीछे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दलों की भागीदारी कम रही तो मतदाता सूची में त्रुटियां बनी रह सकती हैं, जो चुनावों में विवाद का कारण बन सकती हैं। इतिहास में देखें तो 2017 और 2022 के उत्तराखंड चुनावों में भी मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठे थे, जिससे पार्टियों को सबक मिलना चाहिए था।

भाजपा का कांग्रेस पर हमला

भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेर रही है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक और प्रवक्ता विनोद चमोली कहते हैं कि कांग्रेस के पास मजबूत संगठनात्मक ढांचा नहीं है, जिसकी वजह से वह एजेंट नियुक्त करने में असफल हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा का नेटवर्क व्यापक है और विशेषज्ञों से भरा पड़ा है, इसलिए वे समय से पहले सभी बूथों पर एजेंट तैनात कर लेंगे।

चमोली ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर वोट चोरी का प्रचार तो करती है, लेकिन असल में मतदाता सूची सुधारने में सहयोग नहीं दे रही। उनका सुझाव है कि कांग्रेस को बेकार के मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय एसआईआर प्रक्रिया में सक्रिय होना चाहिए।

कांग्रेस का पलटवार और रुख

कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा का बयान बचकाना है। उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने खुद माना है कि सभी दल इस प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं ले रहे, जिसमें भाजपा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास पर्याप्त लोग हैं और समय सीमा के भीतर सभी एजेंट नियुक्त कर लिए जाएंगे। गोदियाल ने मैच की मिसाल देते हुए कहा कि अभी खेल चल रहा है, लेकिन भाजपा अपने थोड़े से आगे होने पर जीत का दावा कर रही है।

वोट चोरी का मुद्दा अभी भी गर्म

कांग्रेस वोट चोरी के अपने आरोपों पर अड़ी हुई है। गोदियाल का कहना है कि भाजपा चुनाव आयोग और सरकार के साथ मिलकर ऐसी व्यवस्था कर रही है, जहां कई सालों से रह रहे लोगों के वोट काट दिए जाते हैं या गलत जगह ट्रांसफर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर से अगर आयोग अपनी गलतियां सुधारता है तो अच्छा, लेकिन अगर यह भाजपा के फायदे के लिए हो रहा है तो कांग्रेस इसका जोरदार विरोध करेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में मतदाता सूची संशोधन एक नियमित प्रक्रिया है, जो हर साल होती है, लेकिन चुनाव से पहले विशेष अभियान चलाए जाते हैं ताकि 99% सटीकता हासिल की जा सके। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में यह चुनौतीपूर्ण है, जहां प्रवास और मौसम जैसे कारक प्रभाव डालते हैं।

आगे क्या?

एसआईआर प्रक्रिया चुनावी निष्पक्षता की कुंजी है। अगर दल सक्रिय नहीं हुए तो मतदाताओं का विश्वास टूट सकता है। निर्वाचन आयोग सभी पार्टियों से अपील कर रहा है कि वे जल्द एजेंट नियुक्त करें। उत्तराखंड के मतदाताओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि उनकी आवाज सही तरीके से सुनी जाए, ताकि 2027 के चुनाव सुचारू रूप से हों।

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