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BEADS™ ने बदला वेस्टवाटर ट्रीटमेंट का खेल, IIT मद्रास की स्टार्टअप ने रचा इतिहास

By Rajat Sharma

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IIT मद्रास से शुरू हुई स्टार्टअप JSP Enviro ने एक ऐसी क्रांतिकारी वेस्टवाटर ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी विकसित की है, जो न सिर्फ पर्यावरण को बचाएगी बल्कि उद्योगों को मुनाफा भी दिलाएगी। इस टेक्नोलॉजी को ‘Bio-Electrochemical Anaerobic Digestor System’ यानी BEADS™ नाम दिया गया है।

तमिलनाडु के उद्योगों में इस टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वक लागू करने के बाद अब JSP Enviro इसे पूरे भारत में फैलाने की तैयारी कर रही है। यह टेक्नोलॉजी न केवल वेस्टवाटर को साफ करती है, बल्कि बिजली बचाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करती है।

BEADS™ टेक्नोलॉजी 

JSP Enviro के सह-संस्थापक और IIT मद्रास के पूर्व छात्र डॉ. वी.टी. फिदल कुमार ने बताया कि पारंपरिक वेस्टवाटर ट्रीटमेंट सिस्टम में ऑक्सीजन पंप करने के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। लेकिन BEADS™ बिना ऑक्सीजन के काम करता है। यह सिस्टम माइक्रोबियल ट्रीटमेंट के साथ इलेक्ट्रोड्स को जोड़कर ऑर्गेनिक वेस्ट को तेजी से तोड़ता है और साथ ही वेस्ट से बिजली भी पैदा करता है।

खास बात यह है कि BEADS™ को बार-बार इलेक्ट्रोड बदलने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही इसमें केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। यह टेक्नोलॉजी बिना बिजली और केमिकल्स के वेस्टवाटर को साफ करती है और न्यूनतम स्लज (कीचड़) पैदा करती है।

तमिलनाडु के इरोड और पेरुंदुरई में दो औद्योगिक इकाइयों में BEADS™ को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। इससे उद्योगों को यह विश्वास हो गया है कि सस्टेनेबल वेस्टवाटर मैनेजमेंट न केवल संभव है, बल्कि यह मुनाफे का सौदा भी है।

JSP Enviro 

2019 में IIT मद्रास के पूर्व छात्रों द्वारा स्थापित JSP Enviro सस्टेनेबल वेस्टवाटर ट्रीटमेंट पर केंद्रित है। यह स्टार्टअप दुनिया की सबसे बड़ी ग्रीन बिजनेस प्रतियोगिता ‘Climate Launchpad’ में दूसरा स्थान हासिल करने वाली पहली भारतीय स्टार्टअप बन चुकी है। इस जीत ने JSP Enviro को यूरोप के क्लाइमेट-बेस्ड एक्सेलेरेटर से फंडिंग दिलाई। कंपनी का लक्ष्य है कि वह सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे, यानी औद्योगिक वेस्टवाटर को रीयूज और रीसाइकिल करे।

पर्यावरण और मुनाफे का डबल फायदा

JSP Enviro की सह-संस्थापक और सीईओ डॉ. प्रियाधर्शिनी मणि, जो लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर से पीएचडी होल्डर हैं, ने बताया कि BEADS™ न केवल ऑपरेशनल खर्चे बचाता है, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा फायदा पहुंचाता है। हर 100 क्यूबिक मीटर वेस्टवाटर को ट्रीट करने वाली BEADS™ इंस्टॉलेशन सालाना करीब 80 टन CO₂ उत्सर्जन को रोकती है। ग्लोबल मार्केट में कार्बन क्रेडिट के अवसर बढ़ रहे हैं और यूरोपीय यूनियन ने कार्बन टैक्स लागू किया है। ऐसे में BEADS™ अपनाने वाले भारतीय निर्माता अपनी उत्सर्जन कटौती से आर्थिक लाभ भी कमा सकते हैं।

उद्योगों ने BEADS™ के इस्तेमाल से बिजली और केमिकल्स के खर्च में कमी और स्लज डिस्पोजल की चुनौतियों में कमी की बात कही है। कंपनी का अनुमान है कि ज्यादातर इंस्टॉलेशन्स में 3 से 4 साल में निवेश की वापसी हो सकती है, जो इसे लागत के प्रति सजग निर्माताओं के लिए आकर्षक बनाता है।

भविष्य की योजनाएं

JSP Enviro वर्तमान में तमिलनाडु के पेरुंदुरई और इरोड के SIPCOT औद्योगिक क्षेत्रों में टेक्सटाइल और डाइंग क्लस्टर के साथ काम कर रही है। कंपनी अब खाद्य और पेय, फार्मास्यूटिकल्स, और स्पेशियलिटी केमिकल्स जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार की योजना बना रही है, जहां सस्टेनेबल और लागत प्रभावी वेस्टवाटर ट्रीटमेंट की सख्त जरूरत है। BEADS™ के साथ, JSP Enviro दिखा रही है कि स्वच्छ संचालन और लागत दक्षता एक साथ चल सकते हैं।

भारत की क्लाइमेट-टेक क्रांति

JSP Enviro की यह यात्रा भारत के क्लाइमेट-टेक इकोसिस्टम की कहानी को दर्शाती है—स्थानीय स्तर पर जन्मी नवाचार, जो वैश्विक प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं। दुनिया भर में उद्योगों पर उत्सर्जन कम करने और संसाधनों का कुशलता से उपयोग करने का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में BEADS™ जैसी टेक्नोलॉजी वेस्टवाटर ट्रीटमेंट के भविष्य के लिए एक नया मानक स्थापित कर सकती है।

JSP Enviro के बारे में

JSP Enviro औद्योगिक वेस्टवाटर ट्रीटमेंट, प्रदूषित जल निकायों की बहाली, लैंडस्केपिंग और वाटर रीयूज के लिए काम करती है। कंपनी का लक्ष्य सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना और प्रदूषण नियंत्रण के लिए वन-स्टॉप सॉल्यूशन देना है। इसकी R&D टीम हर औद्योगिक क्षेत्र और क्लाइंट के लिए अनुकूलित प्रोडक्ट्स तैयार करती है। BEADS™ टेक्नोलॉजी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो ऊर्जा-कुशल, कम लागत और पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।

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