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Pitru Paksha Shraddh Rules : पितृ पक्ष में इन गलतियों से बचें, वरना परिवार पर आ सकता है संकट

By Rajat Sharma

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Pitru Paksha Shraddh Rules : हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है। इसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है। इस समय पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण का विधान है।

मान्यता है कि इस अवधि में पितरों को याद करके नियमपूर्वक कर्म करने से उनकी आत्मा तृप्त होती है और वंशजों को उनका आशीर्वाद मिलता है।

इस साल पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक चलेगा। इन 15 दिनों को बहुत पवित्र माना जाता है। कहा जाता है कि इस दौरान पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से अन्न, जल और दान की अपेक्षा रखते हैं।

इसी कारण इस समय खानपान और आचरण से जुड़ी कई सावधानियां रखनी जरूरी है।

पितृ पक्ष में किन चीजों का सेवन वर्जित है?

मांसाहार

पितृ पक्ष के दौरान घर में सादा और सात्त्विक भोजन बनाने की परंपरा है। अगर इस समय मांस, मछली या अंडे का सेवन किया जाए तो इसे पितरों के प्रति अनादर माना जाता है।

तामसिक भोजन आत्मा की शांति में बाधा डालता है और इससे पितृ दोष भी लग सकता है।

शराब और नशा

इस दौरान शराब, सिगरेट, बीड़ी या किसी भी तरह का नशा करना महापाप माना गया है। ऐसा करने से श्राद्ध कर्म का पुण्य नष्ट हो जाता है और पूर्वज नाराज हो सकते हैं।

प्याज और लहसुन

हिन्दू धर्म में प्याज और लहसुन को तामसिक माना गया है। पूजा-पाठ और किसी भी शुभ कार्य में इनका सेवन वर्जित होता है।

पितृ पक्ष के समय इनका इस्तेमाल करने से श्राद्ध और पिंडदान में बाधा आती है।

उड़द व मसालेदार दाल

उड़द और मसूर की दाल का सेवन इस अवधि में शुभ नहीं माना जाता। इसे तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे भोजन से पितरों की कृपा मिलने में बाधा आती है।

कुछ सब्जियां

पितृ पक्ष में मूली, गाजर, शलजम और खीरे जैसी सब्जियां खाने से भी बचना चाहिए। इन्हें तामसिक प्रवृत्ति का माना गया है और मान्यता है कि इनका सेवन करने से पितर अप्रसन्न हो सकते हैं।

पितृ पक्ष केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि यह पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर भी है।

इस दौरान सात्त्विक भोजन, नियमों का पालन और सादगी से किया गया श्राद्धकर्म न केवल पितरों की आत्मा को शांति देता है, बल्कि वंशजों के जीवन में भी सुख-समृद्धि लाता है।

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