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सीमा पर तैनात जवानों के लिए सरकार ने किया बड़ा ऐलान – अब परिवारों की चिंता खत्म

By Rajat Sharma

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श्रीनगर, 26 जुलाई 2025: देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के परिवारों को अब कानूनी मुश्किलों का सामना अकेले नहीं करना पड़ेगा। भारत में पहली बार उनके लिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने वाली ‘एनएएलएसए वीर परिवार सहायता योजना 2025’ की शुरुआत आज श्रीनगर में हुई।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि सैनिक बिना किसी चिंता के देश की सेवा करें, क्योंकि उनके परिवार की कानूनी जरूरतों का ख्याल अब देश की न्यायपालिका रखेगी।

इस ऐतिहासिक पहल का उद्घाटन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के कार्यकारी अध्यक्ष और भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया। इस मौके पर केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उपस्थित थे।

इस योजना की प्रेरणा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिली, जब न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सैनिकों की कठिनाइयों और उनके बलिदानों को करीब से देखा। उन्होंने महसूस किया कि सैनिकों के परिवारों को कानूनी समस्याओं में सहायता की जरूरत है। एक समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा, “जब एक जवान सीमा पर देश की रक्षा करता है, तो उसे यह विश्वास होना चाहिए कि उसके परिवार के अधिकारों की रक्षा न्यायपालिका करेगी।”

इस योजना के तहत सैनिकों के परिवारों को संपत्ति विवाद, पारिवारिक मामले, वित्तीय लेन-देन और अन्य कानूनी मुद्दों में मुफ्त सलाह और सहायता मिलेगी। इसके लिए देशभर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के माध्यम से विशेष शिविर और हेल्पलाइन शुरू की जाएंगी।

योजना के तहत भारतीय सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी और अन्य अर्धसैनिक बलों के जवानों के परिवारों को शामिल किया गया है। अब जवानों को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी। एनएएलएसए स्वतः कानूनी समस्याओं की पहचान करेगा और प्रशिक्षित वकीलों के जरिए कोर्ट में उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा।

यह योजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सैनिक अक्सर दुर्गम क्षेत्रों में लंबे समय तक तैनात रहते हैं और छुट्टी न मिलने के कारण कानूनी मामलों में हिस्सा नहीं ले पाते। इससे उन्हें कई बार नुकसान उठाना पड़ता है। अब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्वतः संज्ञान लेकर त्वरित सहायता प्रदान करेगा।

इस योजना को पूरे देश में लागू करने की तैयारी है। इसके लिए एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम भी बनाया जा रहा है, ताकि हर मामले पर नजर रखी जा सके। बताया जा रहा है कि जब न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश बनेंगे, तब वे इस योजना को और विस्तार देंगे। इस पहल का संदेश स्पष्ट है- सैनिक देश की सेवा करें, उनके परिवार की कानूनी सुरक्षा का जिम्मा अब न्यायपालिका संभालेगी।

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