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Dehradun News: देहरादून पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाने वाली महिला का वीडियो वायरल, सच आया सामने

By Rajat Sharma

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Dehradun News: देहरादून के रेसकोर्स इलाके में 13 अगस्त 2025 को एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। जी-3 रेसकोर्स निवासी साक्षी, पत्नी सन्नी कुमार, ने नेहरू कॉलोनी थाने की फव्वारा चौकी पर शिकायत दर्ज की। उनकी शिकायत थी कि उनके घर की बिजली लाइन टूटने की वजह से बिजली गुल थी।

बिजली विभाग ने नई लाइन लगाने का काम शुरू किया, लेकिन पड़ोस की श्रीमती संतोष रावत और उनकी बेटी ज्योति रावत ने इसमें रुकावट डाली। इतना ही नहीं, उन्होंने साक्षी और उनके परिवार को गालियां दीं और जान से मारने की धमकी भी दी।

पुलिस पर भी हमला, मामला गरमाया

शिकायत मिलते ही फव्वारा चौकी से चीता मोबाइल पुलिस मौके पर पहुंची। वहां संतोष रावत और उनकी बेटी पड़ोसियों से गाली-गलौज कर रही थीं। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की और थाने में शिकायत दर्ज करने को कहा। लेकिन इसके बजाय दोनों महिलाएं और उग्र हो गईं और पुलिसकर्मियों से भी बदतमीजी करने लगीं।

हालात बिगड़ते देख थाने से महिला उपनिरीक्षक कुसुमलता पुरोहित और महिला कांस्टेबल स्वाती को मौके पर भेजा गया। लेकिन संतोष रावत और ज्योति ने इनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया। संतोष ने पुलिस पर ईंट से हमला करने की कोशिश की, जबकि ज्योति ने महिला कांस्टेबल के साथ हाथापाई की और सरकारी काम में बाधा डालते हुए जान से मारने की धमकी दी।

दोनों महिलाएं गिरफ्तार, थाने में हंगामा

हालात बेकाबू होते देख अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। दोनों महिलाओं को गिरफ्तार कर नेहरू कॉलोनी थाने लाया गया। महिला उपनिरीक्षक कुसुम पुरोहित की तहरीर पर संतोष और ज्योति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

मुकदमे में धारा 115(2), 352, 351(3), 121(1), और 132 बीएनएस के तहत मामला दर्ज हुआ। दोनों को नोटिस देकर उनके परिजनों को सौंप दिया गया। मामले की जांच वरिष्ठ उपनिरीक्षक विकास शुक्ला कर रहे हैं।

पुलिस पर उल्टे आरोप, वीडियो ने खोली पोल

संतोष रावत ने थाने से निकलते ही पुलिस पर मारपीट और बदतमीजी के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ मारपीट की गई और वे चोटिल हुईं। लेकिन वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि संतोष अपने वकील के साथ थाने में आराम से बैठकर बात कर रही थीं और बाद में सुरक्षित बाहर निकल गईं।

इस वीडियो ने उनके आरोपों की पोल खोल दी। यह साफ है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्होंने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए ये कहानी गढ़ी। मामले की जांच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने डालनवाला क्षेत्राधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी है।

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