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दून पुलिस ने किया वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़, मैकेनिक साथी के गोदाम से कटे हुए पुर्जे बरामद

By Rajat Sharma

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देहरादून में मास्टर चाबी से उड़ाई जा रही थीं गाड़ियां, पुलिस ने कबाड़ बनने से पहले दबोचा गिरोह

देहरादून। नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र में लगातार हो रही बाइक और स्कूटी चोरी की वारदातों पर लगाम लगाते हुए दून पुलिस ने एक शातिर अंतर-जिला वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून प्रमेंद्र डोभाल के कड़े निर्देश पर गठित विशेष टीम ने जाल बिछाकर गिरोह के तीन मुख्य गुर्गों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से भारी मात्रा में चोरी के वाहन और कटे हुए पार्ट्स बरामद किए हैं।

थाना नेहरू कॉलोनी क्षेत्र के अंतर्गत अलग-अलग इलाकों से लगातार दोपहिया वाहनों के गायब होने की शिकायतें दर्ज हो रही थीं। इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोभाल ने तत्काल टीमों का गठन कर घटनास्थलों के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के आदेश दिए थे।

पुलिस टीम ने स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और पूर्व में जेल जा चुके अपराधियों का भौतिक सत्यापन शुरू किया। इसी कड़ी में 2 जुलाई 2026 को पुलिस चेकिंग के दौरान मुखबिर की सटीक सूचना पर तीनों अभियुक्तों को नेहरू कॉलोनी इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान मोहन क्षेत्री उर्फ मांचा पुत्र दिल बहादुर (निवासी हरिपुर नवादा, निकट शिव मंदिर, जंगल रोड, नेहरू कॉलोनी), वीरपाल उर्फ भेड़ पुत्र सरफराज (निवासी मिनी मसूरी नवादा, नेहरू कॉलोनी) और अरसल पुत्र असलम (निवासी रफीक का मकान, भगत सिंह कॉलोनी, रायपुर) के रूप में हुई है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि मोहन उर्फ मांचा दिहाड़ी मजदूरी करता है और वीरपाल सिटी बस में कंडक्टर का काम करता है। यह दोनों अत्यधिक नशे के आदी हैं और अपनी नशे की लत की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इन्होंने मिलकर वाहन चोरी का यह धंधा शुरू किया था।

पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि मोहन और वीरपाल देहरादून के सुनसान इलाकों में खड़े दोपहिया वाहनों की रेकी करते थे। इसके बाद अपने पास मौजूद मास्टर की (मास्टर चाबी) का इस्तेमाल कर वाहनों का लॉक खोल लेते थे। जिन गाड़ियों का लॉक मास्टर की से नहीं खुलता था, उनका लॉक झटके से तोड़कर फरार हो जाते थे। इसके बाद वे चोरी की इन गाड़ियों को अपने तीसरे साथी अरसल को बेच देते थे, जो पेशे से मैकेनिक है। अरसल इन वाहनों के पुर्जे-पुर्जे अलग करके कबाड़ियों को ठिकाने लगा देता था, ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।

पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर विभिन्न स्थानों से कुल 2 मोटरसाइकिल, 6 एक्टिवा और 2 अन्य एक्टिवा के कटे हुए इंजन व पार्ट्स बरामद किए हैं। बरामद किए गए वाहनों में मोटर साइकिल संख्या UK07DH0654 (मु०अ०सं० 214/26), स्कूटी UK07AK8806 (मु०अ०सं० 242/26), होंडा एक्टिवा UK07Z9260, स्कूटी UK07HJ9145, स्कूटी UK07AX2368, स्कूटी UK07DX1753, स्कूटी UK07DU1324 और एक बिना नंबर की मोटरसाइकिल (चेसिस नंबर MBLHA10ABBHB19953, मु०अ०सं० 236/26) शामिल हैं। इसके अलावा स्कूटी संख्या UK07BN4665 (मु०अ०सं० 234/26) और स्कूटी संख्या UK07BE0673 (मु०अ०सं० 243/26) के कटे हुए पार्ट्स बरामद हुए हैं। इन सभी मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) और 317 के तहत मुकदमे दर्ज हैं।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुख्य आरोपी मोहन क्षेत्री उर्फ मांचा का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। वह इससे पहले थाना नेहरू कॉलोनी में साल 2021 में आर्म्स एक्ट की धारा 4/25 के तहत दो अलग-अलग मुकदमों (मु०अ०सं० 489/21 और 263/21) और साल 2025 में बीएनएस की धारा 303(2) व 317(2) के तहत एक मुकदमे (मु०अ०सं० 23/25) में जेल जा चुका है। गिरोह के अन्य सदस्यों के आपराधिक इतिहास का पता लगाया जा रहा है। इस शानदार कामयाबी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस टीम को 2,500 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है।

इस सफल कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में थानाध्यक्ष मनोज नौटियाल, वरिष्ठ उपनिरीक्षक आशीष कुमार, चौकी प्रभारी जोगीवाला गिरीश बडोनी, चौकी प्रभारी बाईपास विनय मोहन द्विवेदी, अपर उपनिरीक्षक मदन सिंह बिष्ट, हेड कांस्टेबल हितेश, श्रीकांत ध्यानी, कांस्टेबल अर्जुन सिंह, संदीप और सुमित शामिल रहे।

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