सीएम धामी का ड्रीम प्रोजेक्ट पकड़ेगा रफ्तार, जून 2026 तक चमकेगा देहरादून का आढ़त बाजार
देहरादून : राजधानी के सबसे व्यस्त और भारी ट्रैफिक जाम से जूझने वाले सहारनपुर रोड का ‘चोक गला’ अब पूरी तरह खुलने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ड्रीम आढ़त बाजार पुनर्विकास परियोजना के आड़े आने वाले अतिक्रमणकारियों और अड़ंगेबाजों के खिलाफ मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने सख्त रुख अपनाते हुए दोटूक हिदायत दी है कि जिन लोगों ने सरकारी खजाने से मुआवजा यानी प्रतिकर राशि डकार ली है, लेकिन इसके बावजूद अपनी पुरानी दुकानों या मकानों पर कब्जा जमाए बैठे हैं, उन्हें तुरंत हटना होगा।
उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी खुद इन विवादित जमीनों और परिसंपत्तियों का ग्राउंड जीरो पर जाकर स्थलीय निरीक्षण करेंगे। औचक निरीक्षण के तत्काल बाद बिना किसी ढिलाई के बलपूर्वक ध्वस्तीकरण यानी सीधे बुलडोजर चलाने की कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा। बुधवार को एमडीडीए सभागार में हुई एक बेहद उच्चस्तरीय और तीखी समीक्षा बैठक में साफ कर दिया गया कि देहरादून के भविष्य के इस सबसे बड़े शहरी और व्यापारिक पुनर्विकास कार्य में अब एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को जून 2026 तक इस मेगा प्रोजेक्ट से जुड़े हर एक लंबित काम को हर हाल में 100 फीसदी पूरा करने की अंतिम समयसीमा (डेडलाइन) थमा दी गई है।
सहारनपुर चौक से लेकर तहसील चौक तक फैले इस 1.55 किलोमीटर लंबे बेहद संकरे हिस्से को अब पूरी तरह से 24 मीटर चौड़ा किया जाना है। पहले इस प्रोजेक्ट के बीच में मेट्रो रेल के पिलर खड़े करने के लिए सड़क के मध्य भाग (मीडियन) को ज्यादा चौड़ा रखने का प्रस्ताव था, लेकिन मेट्रो योजना के फिलहाल खटाई में पड़ने के कारण अब मीडियन को सामान्य रखा जाएगा और सड़क को एकसमान 24 मीटर का ही आकार दिया जाएगा। इस मास्टर प्लान की जद में गांधी रोड से तहसील चौक के बीच करीब 430 भू-स्वामी और किरायेदार आ रहे हैं। इनमें से लगभग 350 लोगों ने पुनर्वास नीति के तहत मुआवजा या वैकल्पिक प्लॉट का विकल्प चुन लिया है, जबकि 30 से अधिक ऐसी संपत्तियां हैं जिनके आपसी कानूनी और पारिवारिक विवाद कोर्ट में लंबित हैं। प्राधिकरण ऐसे विवादित मामलों का मुआवजा सीधे कोर्ट में जमा करा रहा है ताकि मुकदमों के चक्कर में जनहित का यह बड़ा काम न लटके। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के प्रांतीय खंड ने शुरुआत में इसके लिए 24 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाई थी, जिसे बाद में कुछ संशोधनों के साथ 16 करोड़ रुपये अंतिम रूप दिया गया है।
प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए प्रभावित परिसंपत्तियों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुपरफास्ट मोड में डाला गया है। उपाध्यक्ष के कड़े निर्देशों के बाद अब हर हफ्ते के बुधवार और शनिवार को विशेष रूप से केवल रजिस्ट्री के काम निपटाए जाएंगे। एमडीडीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि भू-स्वामियों को रजिस्ट्री से ठीक पहले एक कानूनी शपथ पत्र (अफेडेविट) देना अनिवार्य है, जिसके मुताबिक रजिस्ट्री होने के ठीक 15 दिनों के भीतर उन्हें अपने प्रभावित ढांचे को खुद तोड़ना होगा। तय समय में ऐसा न करने पर एमडीडीए, जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की संयुक्त टीम खुद इसे जमींदोज कर देगी।
इसके साथ ही, वर्तमान आढ़त बाजार क्षेत्र में मकड़जाल की तरह फैलीं भारी-भरकम विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों और अन्य बुनियादी ढांचों को वहां से शिफ्ट करने के काम की भी बारीकी से समीक्षा की गई। शासन की ओर से इसके लिए मंजूर किए गए करीब 18 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को लोक निर्माण विभाग को तत्काल ट्रांसफर करने का आदेश दिया गया है ताकि तकनीकी शिफ्टिंग का काम हवा की गति से आगे बढ़ सके। बैठक में एमडीडीए की चर्चित ‘आलयम आवासीय योजना’ की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी खंगाली गई। इस आवासीय परियोजना के भी बचे हुए निर्माण कार्यों को जून माह तक हर हाल में खत्म कर पात्र गरीब और मध्यमवर्गीय लाभार्थियों को उनके फ्लैटों का कब्जा सौंपने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
इस बेहद अहम बैठक में एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया, संयुक्त सचिव प्रत्यूष, वित्त नियंत्रक संजीव कुमार, अधीक्षण अभियंता अतुल गुप्ता, अधिशासी अभियंता सुनील कुमार और लेखपाल नजीर अहमद मौजूद रहे, जिन्होंने अब तक के निर्माण कार्यों का पूरा लेखा-जोखा रखा। वहीं सड़क चौड़ीकरण का जिम्मा संभाल रहे लोक निर्माण विभाग की तरफ से अधिशासी अभियंता राजेश कुमार और सहायक अभियंता मुकेश कुमार ने हिस्सा लिया और अपनी तैयारियों का ब्लूप्रिंट पेश किया। इस महा-परियोजना के पूरा होते ही देहरादून के मुख्य बाजार को जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी और व्यापारियों को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त नया कमर्शियल हब नसीब होगा।






