देहरादून प्रशासन का सख्त संदेश: जनसमस्याओं पर ढिलाई की तो नपेंगे अधिकारी, डीएम ने खुद संभाला मोर्चा
देहरादून : उत्तराखंड की राजधानी में सरकारी तंत्र की सुस्ती पर जिलाधिकारी सविन बंसल का चाबुक चला है। झंडा मोहल्ला तालाब क्षेत्र में महीनों से रिसती पाइपलाइन और गंदगी से परेशान एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की गुहार पर डीएम ने न केवल जल संस्थान को मौके पर दौड़ाया, बल्कि लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त जांच के आदेश भी दे दिए हैं।
जिला प्रशासन अब जनमानस की छोटी से छोटी समस्याओं को फाइलों में दबाने के बजाय धरातल पर निस्तारण करने की रणनीति अपना रहा है। इसी कड़ी में झंडा मोहल्ला निवासी वरिष्ठ नागरिक श्रीमती रानी महेंद्रु ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर जल संयोजन पाइप क्षतिग्रस्त होने और नालियों में जमा कूड़े की शिकायत की थी।
शिकायतकर्ता ने बताया कि पाइपलाइन लीकेज के कारण महीनों से सड़क पर पानी बह रहा था, जिससे फिसलन और दुर्घटनाओं का अंदेशा बना हुआ था। जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) तलब की, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया।
डीएम के कड़े रुख के बाद नींद से जागे जल संस्थान की टीम ने युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया। विभाग ने मौके पर पहुंचकर न केवल क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत की, बल्कि क्षेत्र में बाधित जलापूर्ति को भी तत्काल बहाल कर दिया। प्रशासन ने नगर निगम के माध्यम से नालियों की सफाई कराकर क्षेत्र को गंदगी मुक्त कराया है।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि पूर्व में मरम्मत के नाम पर लीपापोती की गई थी और संबंधित कर्मियों ने उपभोक्ता से ही सामग्री मंगवाई थी। डीएम ने इस वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता पर गहरी नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
देहरादून जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए ताकि उन्हें दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।






