उत्तराखंड में पंजाब के पते पर बने फर्जी शस्त्र लाइसेंस का भंडाफोड़, STF ने दबोचा मुख्य गुर्गा
पंजाब से बनवाते थे जाली लाइसेंस, फिर दून में ऐसे कराते थे रजिस्टर; STF ने अमित यादव को किया अरेस्ट
देहरादून (ब्यूरो)। उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उन्हें पहाड़ में वैध कराने वाले एक बड़े सिंडिकेट का स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पर्दाफाश किया है। एसटीएफ ने राजधानी के शिमला बाईपास इलाके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो पंजाब के जाली दस्तावेजों के आधार पर उत्तराखंड में हथियार रजिस्टर कराकर कानून को चकमा दे रहा था।
मुख्यमंत्री के ‘अपराध मुक्त देवभूमि’ विजन के तहत डीजीपी दीपम सेठ के आदेश पर ‘ऑपरेशन प्रहार’ चलाया जा रहा है। इसी अभियान के दौरान एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह को इनपुट मिला था कि कुछ शातिर अपराधी बाहरी राज्यों से फर्जी लाइसेंस और एनओसी (NOC) के जरिए उत्तराखंड के जिला प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं।
एसटीएफ की टीम ने जब अमृतसर और मेरठ के जिलाधिकारी कार्यालयों से पत्राचार कर रिकॉर्ड खंगाला, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। पुलिस के रडार पर आए अमित यादव पुत्र डालचन्द यादव के लाइसेंस नंबर LN34041A7A1AA7/1499 की जांच की गई। रिकॉर्ड के मुताबिक, इसे साल 2017 में अमृतसर से देहरादून ट्रांसफर दिखाया गया था, लेकिन अमृतसर प्रशासन ने पुष्टि की कि ऐसा कोई लाइसेंस वहां से कभी जारी ही नहीं हुआ।
एसटीएफ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हनुमन्त रेजीडेंसी, शिमला बाईपास स्थित फ्लैट नंबर 807 में दबिश देकर अमित यादव को दबोच लिया। उसके कब्जे से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद हुआ है।
पूछताछ में आरोपी ने कुबूल किया कि वह बड़े स्तर पर बाहरी राज्यों से जाली लाइसेंस बनवाकर उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों में उन्हें असली के रूप में दर्ज करा रहा था।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के मुताबिक, यह गिरोह जाली एनओसी का इस्तेमाल कर सिस्टम की कमियों का फायदा उठाता है। गौर करने वाली बात यह है कि इसी साल जनवरी में भी एसटीएफ ने मनोज नाम के एक आरोपी को .30 बोर की ऑटोमैटिक पिस्टल और फर्जी लाइसेंस के साथ गिरफ्तार किया था, जिसके तार उत्तर प्रदेश के शामली और मेरठ से जुड़े थे।
अमृतसर और पंजाब के तरनतारन जैसे इलाकों में हाल के दिनों में कई ऐसे ‘सेवा केंद्र’ पकड़े गए हैं, जो करीब 1.5 लाख रुपये लेकर फर्जी लाइसेंस तैयार करते थे।
एसटीएफ अब उन सभी शस्त्र लाइसेंसों की स्क्रूटनी कर रही है जो पिछले कुछ वर्षों में दूसरे राज्यों से उत्तराखंड ट्रांसफर होकर आए हैं।
इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाने वाली टीम में इंस्पेक्टर अबुल कलाम, सब-इंस्पेक्टर विद्यादत्त जोशी और हेड कांस्टेबल बिजेन्द्र चौहान समेत संजय और मोहन असवाल शामिल रहे। पुलिस अब अमित यादव के आपराधिक इतिहास और इस गिरोह के अन्य मददगारों की तलाश में जुटी है।






