देहरादून : यूजीसी के नए कानून को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच उत्तराखंड के युवा लेखक अंकित भट्ट ने सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह कानून सामान्य वर्ग के बीच असुरक्षा, असंतुलन और भेदभाव की गहरी भावना पैदा कर रहा है, जो शिक्षा जगत के लिए खतरा है।
भट्ट, जो क्षेत्रीय साहित्य और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय कलम चलाते हैं, ने अपने बयान में स्पष्ट किया, “शिक्षा में समानता और भेदभाव-मुक्त वातावरण का मैं पूर्ण समर्थन करता हूं। लेकिन यदि कोई कानून सामान्य वर्ग को असुरक्षा और असंतुलन की भावना देता है, तो सरकार और संवैधानिक संस्थाओं की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।”
उन्होंने आगे जोर देकर कहा, “सामान्य वर्ग के साथ मानसिक, संस्थागत या सामाजिक अन्याय अस्वीकार्य है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना के विरुद्ध है।” भट्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे जल्द समाधान निकालें, ताकि शिक्षण संस्थानों में समानता का वातावरण बने और भेदभाव की कोई गुंजाइश न रहे।
देश भर में छात्र संगठनों और बुद्धिजीवियों के विरोध के बीच भट्ट का यह बयान सामान्य वर्ग की चुप्पी भंग करने वाला साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुधार न हुए, तो उच्च शिक्षा क्षेत्र में गहरा संकट पैदा हो सकता है। अंकित भट्ट ने अपनी इस चिंता को सोशल मीडिया पर भी साझा किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है।







