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उत्तराखंड कैबिनेट की बड़ी मंजूरी : स्वास्थ्यकर्मियों को जिला बदलने की छूट, हरित हाइड्रोजन नीति से स्वच्छ ऊर्जा क्रांति

By Rajat Sharma

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देहरादून। उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक अहम बैठक में राज्य के विकास को गति देने वाले आठ महत्वपूर्ण निर्णय लिए। स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधा से लेकर हरित ऊर्जा नीति तक, ये फैसले राज्य की स्वास्थ्य, औद्योगिक, जनजातीय कल्याण, शिक्षा और पर्यावरणीय जरूरतों को मजबूत करेंगे। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता, उद्योग स्थापना और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में नई दिशा दी है।

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सबसे पहले, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं व पर्यवेक्षकों को राहत मिली। जिन्होंने मूल संवर्ग में कम से कम 5 वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी की हो, उन्हें पूरे सेवा काल में एक बार आपसी सहमति से जिला परिवर्तन की अनुमति दी गई। कैबिनेट ने इस पर पूर्ण स्वीकृति प्रदान की, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में लचीलापन आएगा।

भूमि अधिग्रहण में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए कैबिनेट ने लघु, मध्यम व वृहद परियोजनाओं के लिए भूस्वामियों से आपसी समझौते पर भूमि खरीद की प्रक्रिया निर्धारित की। भूमि अर्जन अधिनियम 2013 की जटिलताओं से बचने का यह तरीका मुकदमेबाजी कम करेगा और जनहित परियोजनाओं की लागत घटाएगा। उधम सिंह नगर के प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ जमीन को सिडकुल को औद्योगिक आस्थान के लिए हस्तांतरित करने वाले शासनादेश में संशोधन भी मंजूर हुआ। अब पट्टेदार राजस्व विभाग की सहमति से समान उद्देश्य के लिए उप-पट्टा (सब-लीज) दे सकेंगे, जिससे निवेशकों को प्रोत्साहन मिलेगा।

जनजाति कल्याण को मजबूत करने के लिए देहरादून, चमोली, उधम सिंह नगर व पिथौरागढ़ में 4 जिला जनजाति कल्याण अधिकारी पदों की पुनर्गठित संरचना को मंजूरी मिली। साथ ही, ‘उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026’ प्रख्यापित होगी। भूजल प्रबंधन में सख्ती के तहत गैर-कृषि उपयोग (उद्योग, होटल, स्विमिंग पूल आदि) पर जल मूल्य लगाया जाएगा—सुरक्षित से अतिदोहित क्षेत्र तक की दरें तत्काल लागू। पंजीकरण शुल्क मात्र 5 हजार रुपये रखा गया है, जो उद्योगों को बढ़ावा देगा।

शिक्षा हब बनाने की दिशा में जनपद देहरादून में ‘जी.आर.डी. उत्तराखंड विश्वविद्यालय’ नामक निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की स्वीकृति दी गई। यह वंचित वर्गों के लिए समग्र विकास, शोध व रोजगार पर केंद्रित होगा। रक्षा क्षेत्र में उत्तरकाशी की चिन्यालीसौड़ व चमोली की गौचर हवाई पट्टियों को एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) के रूप में भारतीय वायुसेना को लीज पर हस्तांतरित करने पर सहमति बनी, जो सामरिक महत्व को मजबूत करेगी।

सबसे चर्चित फैसला रहा राज्य में हरित हाइड्रोजन उत्पादन को गति देने वाली ‘उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026’ का प्रख्यापन। जलविद्युत संसाधनों का उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन से नेट जीरो लक्ष्य, रोजगार व कार्बन उत्सर्जन में कमी सुनिश्चित होगी। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से प्रेरित यह नीति राज्य को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर लाएगी।

इन निर्णयों से राज्य सरकार का विकासोन्मुखी विजन साफ झलकता है, जो निवेश, रोजगार व सतत विकास पर केंद्रित है।

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