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सीएम धामी की दो टूक: भ्रष्टाचार पर कोई रहम नहीं, देखें बड़े अफसरों की लिस्ट

By Rajat Sharma

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3 साल में 12 बड़े भ्रष्टाचार केस : उत्तराखंड में धामी की सख्ती का असर

भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड? धामी ने फिर दिखाया क्या होता है सख्ती का मतलब

देहरादून (ब्यूरो)। उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीएम पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। होमगार्ड्स विभाग में वर्दी खरीद की अनियमितताओं पर निदेशक अमिताभ श्रीवास्तव को तुरंत निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी है, जहां पारदर्शिता की कमी और नियम तोड़ने के आरोप लगे। शासन ने जांच के लिए विशेष समिति भी बना दी है। धामी ने साफ कहा कि पद भले ही ऊंचा हो, गलती हुई तो बचाव मुश्किल। यह घटना उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का नया उदाहरण है, जो निचले स्तर से लेकर टॉप अफसरों तक सब पर लागू हो रही।

भ्रष्टाचार क्यों बढ़ रहा है सरकारी खरीद में?

सरकारी टेंडर प्रक्रिया में अक्सर पारदर्शिता की कमी देखी जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ई-टेंडरिंग और सख्त ऑडिट से 30-40% अनियमितताएं रुक सकती हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में होमगार्ड्स जैसी फोर्सेस के लिए वर्दी जैसी बेसिक जरूरतों की खरीद में गड़बड़ी जनता के पैसे की बर्बादी का कारण बनती है। यह न सिर्फ बजट को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि सुरक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है।

तीन सालों में धामी सरकार की बड़ी कार्रवाइयां

पिछले तीन वर्षों में धामी सरकार ने 12 से ज्यादा बड़े मामलों में वरिष्ठ अफसरों पर गिरी है। हरिद्वार भूमि घोटाले में दो IAS और एक PCS सहित 12 लोग सस्पेंड हुए। रामविलास यादव जैसे IAS को जेल भेजा गया। वन विभाग के किशन चंद और पूर्व UKSSSC चेयरमैन RBS रावत भी सलाखों के पीछे पहुंचे। उद्यान निदेशक हरमिंदर सिंह बवेजा, परिवहन निगम के भूपेंद्र कुमार जैसे नामों पर निलंबन की गाज गिरी। ये कार्रवाइयां दिखाती हैं कि अब जांच कृत्य पर आधारित है, व्यक्ति पर नहीं। राज्य में विजिलेंस जांचों की संख्या 2023 से 50% बढ़ी है, जो डेटा से साफ है।

यह क्यों मायने रखता है उत्तराखंड के लिए?

भ्रष्टाचार मुक्त शासन से जनता का भरोसा बढ़ता है और विकास तेज होता है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां पर्यटन और आपदा प्रबंधन पर निर्भरता ज्यादा है, पारदर्शिता जरूरी है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसी कार्रवाइयां निवेशकों को आकर्षित करती हैं और सरकारी योजनाओं का सही लाभ जनता तक पहुंचता है। लंबे समय में इससे टैक्सपेयर्स का पैसा बचता है और सुशासन मजबूत होता है। धामी सरकार का यह रुख भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत संदेश दे रहा है। अब अफसरों में डर है कि नियम तोड़े तो सजा मिलेगी ही।

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