देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला उत्तराखंड देश का अग्रणी राज्य बन गया है। इस क्रांतिकारी कानून ने न केवल सामाजिक समानता को मजबूत किया, बल्कि आम जनता में विवाह पंजीकरण की जागरूकता को भी 24 गुना बढ़ा दिया। आंकड़े बताते हैं कि पुराने कानून के मुकाबले अब प्रतिदिन औसतन 1,634 पंजीकरण हो रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या महज 67 थी।
2022 विधानसभा चुनाव में यूसीसी का वादा करने वाले धामी ने सत्ता संभालते ही पहली कैबिनेट में इसे मंजूरी दी। व्यापक परामर्श और जनमत संग्रह के बाद 27 जनवरी 2025 से यह कानून प्रभावी हो गया। संविधान के अनुच्छेद 44 की दिशा में यह कदम महिलाओं को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों में समान अधिकार देता है। बहुविवाह जैसी कुरीतियों पर लगाम लगाकर यह लैंगिक न्याय सुनिश्चित करता है।
आंकड़ों की झलक :
– पुराना अधिनियम (2010 से 26 जनवरी 2025 तक): कुल 3,30,064 पंजीकरण (प्रतिदिन औसत 67)।
– यूसीसी के 6 माह (27 जनवरी से जुलाई 2025): 3 लाख से अधिक पंजीकरण (प्रतिदिन औसत 1,634)।
इस वृद्धि से साफ है कि यूसीसी ने शादी-ब्याह की प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत बनाया है। देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जैसे जिलों में तो पंजीकरण केंद्रों पर भीड़ उमड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं के सशक्तिकरण को गति देगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यूसीसी किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि सभी को समान अधिकार और सम्मान देने का माध्यम है। विवाह पंजीकरण में आई यह बाढ़ जनता के समर्थन का प्रमाण है। उत्तराखंड ने राष्ट्र को नई राह दिखाई है, और अन्य राज्य भी इसे अपनाएंगे।”
यह फैसला उत्तराखंड को सामाजिक सुधारों का केंद्र बना रहा है, जहां अब पारिवारिक विवादों का निपटारा भी सरल हो रहा है।







