उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों का गुस्सा एक बार फिर भड़क गया है. धामी सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक में ठोस फैसला न होने से हजारों कर्मचारी अब ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. लंबे समय से नियमितीकरण की आस लगाए बैठे इन कर्मियों ने अब सरकार को आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दे दी है.
पिछली कैबिनेट बैठक भी बिना किसी नतीजे के खत्म हुई थी, लेकिन इस बार कर्मचारियों को सरकार से बड़ी उम्मीदें थीं. जब बैठक के फैसलों की सूची सामने आई और उसमें उपनल कर्मियों से जुड़ा कोई प्रस्ताव नहीं दिखा, तो उनका सब्र जवाब दे गया. जानकारी के मुताबिक, बैठक के अंदर अनौपचारिक चर्चा तो हुई, लेकिन कोई लिखित या ठोस निर्णय नहीं लिया गया.
यह स्थिति तब है जब नैनीताल हाईकोर्ट पहले ही कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित करने के निर्देश दे चुका है. सरकार ‘समान कार्य के बदले समान वेतन’ पर विचार करने का दावा तो कर रही है, मगर जमीनी स्तर पर कोई स्पष्ट नीति अब तक नहीं बनी है.
मामले को सुलझाने के लिए सरकार ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक उप-समिति जरूर बनाई है. यह समिति विभिन्न पहलुओं को देख रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसमें सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी को सदस्य तक नहीं बनाया गया. यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि उपनल का पूरा मामला सैनिक कल्याण विभाग के अंतर्गत ही आता है.
सरकार की मंशा पर अब सीधे सवाल उठने लगे हैं. उपनल महासंघ के अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने कहा कि खुद मंत्री कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय लेने की बात कहते हैं, लेकिन कैबिनेट में उनकी फाइल नहीं लाई जा रही. उन्होंने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर अगले एक-दो सप्ताह के भीतर ठोस फैसला नहीं हुआ, तो कर्मचारी फिर से उग्र आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरेंगे.
इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी. गौरतलब है कि हाल ही में एक बड़ा आंदोलन सरकार के आश्वासन पर ही वापस लिया गया था, लेकिन अब कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे रहा है.







