उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा है कि दिल्ली में हाल ही में हुई एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक नारों पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को खुलकर माफी मांगनी चाहिए।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब रैली में कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री से जुड़े बेहद असभ्य शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे भाजपा ने लोकतंत्र की मर्यादा का उल्लंघन बताया है।
राजनीतिक नारेबाजी का इतिहास और इसका असर
भारतीय राजनीति में नारेबाजी और टिप्पणियां हमेशा से विवादों का केंद्र रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में, विपक्षी दलों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार पर की गई टिप्पणियां कई बार सुर्खियां बनी हैं। उदाहरण के तौर पर, 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आई थीं, जहां कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने व्यक्तिगत हमले किए थे।
इन घटनाओं का असर चुनावी नतीजों पर साफ दिखा, जहां भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की। अब दिल्ली की इस रैली में “प्रधानमंत्री की कब्र खुदने” जैसे नारे लगाए गए, जो भाजपा के अनुसार नफरत फैलाने वाली मानसिकता को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी भाषा न सिर्फ राजनीतिक माहौल को खराब करती है, बल्कि मतदाताओं के बीच भी गहरी दरार पैदा कर सकती है।
कांग्रेस की गिरती साख और मुगल साम्राज्य की तुलना
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कदमों को बढ़ावा देने से कांग्रेस और नेहरू परिवार की छवि लगातार खराब हो रही है। भट्ट ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए मुगल वंश के पतन की तुलना की, जहां आंतरिक कलह और जनता से दूरी ने साम्राज्य को खत्म कर दिया।
भारत के राजनीतिक इतिहास में, कांग्रेस ने 1947 से 2014 तक लंबे समय तक सत्ता संभाली, लेकिन हाल के चुनावों में उसकी सीटें घटकर 52 से भी कम रह गई हैं। भट्ट का कहना है कि अगर कांग्रेस ऐसी नफरत भरी राजनीति जारी रखेगी, तो उसका राजनीतिक अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। यह बयान उस समय आया है जब 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की स्थिति पहले से कमजोर दिख रही है, और पार्टी को नए नेतृत्व की तलाश है।
जनभावनाओं को समझने में कांग्रेस की नाकामी
भट्ट ने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता की भावनाओं से कट चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का आंकड़ा देखें तो, हाल के सर्वे जैसे कि सी-वोटर के अनुसार, उनकी अप्रूवल रेटिंग 60% से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में, उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल मतदाताओं को नाराज कर सकता है।
भट्ट ने “मुहब्बत की दुकान” का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने प्यार की बातें तो कीं, लेकिन व्यवहार में नफरत को बढ़ावा दिया। पिछले चुनावों में, 2019 में कांग्रेस को सिर्फ 19.5% वोट मिले, जबकि भाजपा को 37.4%। यह आंकड़े बताते हैं कि जनता व्यक्तिगत हमलों को पसंद नहीं करती। अगर कांग्रेस माफी नहीं मांगेगी, तो आने वाले चुनावों में उसे और नुकसान हो सकता है।
लोकतंत्र में मर्यादा की जरूरत
यह पूरा विवाद भारतीय लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल उठाता है। जहां एक तरफ अभिव्यक्ति की आजादी है, वहीं दूसरी तरफ नेताओं को अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे नारे न सिर्फ व्यक्ति विशेष को निशाना बनाते हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को प्रभावित करते हैं।
भाजपा की मांग है कि कांग्रेस आलाकमान सार्वजनिक रूप से माफी मांगे, ताकि राजनीतिक बहस स्वस्थ रहे। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस पर कैसे प्रतिक्रिया देती है, और क्या यह मुद्दा चुनावी रणनीति का हिस्सा बनेगा।







