उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विजन तेजी से आगे बढ़ रहा है। “ड्रग्स फ्री देवभूमि 2025” अभियान के तहत पुलिस लगातार सक्रिय है, और इसी कड़ी में देहरादून पुलिस ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाया।
हाल ही में, दो अंतरराज्यीय नशा तस्करों को पकड़ा गया, जिनके पास से भारी मात्रा में अवैध ड्रग्स बरामद हुई। यह घटना राज्य में नशे की जड़ें उखाड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां पहाड़ी इलाकों में युवाओं को नशे की लत से बचाने पर जोर दिया जा रहा है।
कैसे हुआ यह ऑपरेशन?
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के सख्त निर्देशों पर पूरे जिले में रात के समय गहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान, कालसी थाना क्षेत्र में पुलिस टीम ने कोटी रोड पर संदिग्ध गतिविधि देखी। दो व्यक्ति भागने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें रोककर पूछताछ की गई।
जांच में पता चला कि वे उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात से आए थे और उनके पास अवैध स्मैक थी। पुलिस ने तुरंत उन्हें हिरासत में लिया और तलाशी में 300 ग्राम स्मैक मिली, जिसकी बाजार कीमत करीब 90 लाख रुपये आंकी गई है।
तस्करों की पृष्ठभूमि और योजना
गिरफ्तार किए गए दोनों युवक मध्य प्रदेश से स्मैक लाकर उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में बेचने की फिराक में थे। एक की उम्र 27 साल है, जबकि दूसरा 18 साल का है। पूछताछ में उन्होंने खुलासा किया कि वे स्थानीय तस्करों के संपर्क में थे और स्मैक को ऊंचे दामों पर बेचने की योजना बना रहे थे।
स्मैक, जो हेरोइन का एक रूप है, बेहद खतरनाक नशा है जो स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाता है और मौत का कारण बन सकता है। उत्तराखंड जैसे पर्यटन प्रधान राज्य में नशे की तस्करी पर्यावरण और समाज दोनों को प्रभावित करती है, और ऐसे गिरोह अक्सर सीमाओं के पार काम करते हैं।
नशे की समस्या पर गहरा असर
उत्तराखंड में नशे की समस्या पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है, खासकर युवाओं में। आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट में ड्रग्स से जुड़े मामले बढ़ते दिख रहे हैं।
मुख्यमंत्री का अभियान इसी को रोकने के लिए है, जिसमें न केवल गिरफ्तारियां बल्कि जागरूकता और पुनर्वास पर भी फोकस है। इस ऑपरेशन से पुलिस को अन्य तस्करों के बारे में सुराग मिले हैं, और आगे की जांच जारी है। ऐसे कदम राज्य को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने में मदद करेंगे।
पुलिस की भूमिका और आगे की राह
इस सफलता के पीछे कालसी थाने की टीम का योगदान अहम है, जिसमें चौकी प्रभारी और अन्य अधिकारी शामिल थे। वे रातभर सतर्क रहकर ऐसे खतरे को रोकने में कामयाब हुए। यह घटना बताती है कि सामूहिक प्रयास से नशे को हराया जा सकता है।
अगर आप या आपके आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो पुलिस से संपर्क करें। उत्तराखंड पुलिस की हेल्पलाइन और ऐप्स के जरिए रिपोर्टिंग आसान है। इस अभियान से उम्मीद है कि 2025 तक राज्य नशा मुक्त हो जाएगा, और पर्यटक व स्थानीय दोनों सुरक्षित महसूस करेंगे।







