देहरादून। ऋण बीमा धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच एक 9 वर्षीय मासूम बेटी की व्यथित विधवा माँ सुप्रिया नौटियाल की पीड़ा को सुनते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा आदेश जारी किया है। सुप्रिया के पति स्वर्गीय प्रदीप रतूड़ी द्वारा एचडीएफसी आरगो जीआईसी लि० से 8.11 लाख रुपये का लिया गया ऋण और उससे जुड़ी बीमा पॉलिसी को लेकर भारी विवाद हुआ।
सुप्रिया ने जिलाधिकारी सविन बसंल के समक्ष अपनी याचिका में बताया कि उनके पति की मृत्यु के बाद भी बैंक और इंश्योरेंस कंपनी द्वारा ऋण राशि की वसूली के लिए उन्हें मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना दी जा रही है। बैंक ने बीमा के दस्तावेज सुप्रिया को कभी ऑफलाइन उपलब्ध नहीं कराए, जबकि यह ऋण लेने के बाद अनिवार्य थे। इसके बावजूद बैंक ने वाहन जब्त करने की धमकी दी, जिससे विधवा माँ और उसके छोटे बच्चे की समस्या और बढ़ गई।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एचडीएफसी आरगो जीआईसी लि० के विरुद्ध 8.11 लाख रुपये की Recovery Certificate (आरसी) काटते हुए फरमान दिया है कि कंपनी को पांच दिन के भीतर ऋण माफी करनी होगी, अन्यथा संबंधित संपत्ति की कुर्की एवं नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। साथ ही जिलाधिकारी ने तहसीलदार सदर को निर्देशित किया है कि भू-राजस्व के बकाया की भाँति तत्काल वसूली सुनिश्चित की जाए। यह मामला अकेला नहीं है।
जिले में कई अन्य बैंक और बीमा कंपनियां भी जनमानस को बीमित ऋण होने के बाद भी प्रताड़ित करने के आरोपों के तहत प्रशासन की नजर में हैं। डीएम ने साफ किया है कि ऐसे धोखाधड़ी मामलों पर हर स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जाएगी तथा आवश्यकतानुसार शाखाओं को सील भी किया जाएगा।
इस निर्णय से ऋण धोखाधड़ी के शिकार आम लोगों को बड़ी उम्मीद जगी है। साथ ही बैंक एवं बीमा कंपनियों को भी स्पष्ट संदेश गया है कि सामाजिक न्याय और कानून की ताकत से उससे उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।







