EPFO Pension Eligibility : कर्मचारियों के रिटायरमेंट और भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) समय-समय पर कई नियम और प्रावधान लागू करता रहता है। इसका मकसद हर कामगार को मजबूत वित्तीय सहारा देना है। ज्यादातर कर्मचारियों के मन में ये बड़ा सवाल घूमता रहता है कि अगर सिर्फ 10 साल ही नौकरी की तो EPFO पेंशन मिलेगी या नहीं?
ये सवाल अक्सर गलत जानकारी और अफवाहों की वजह से और उलझ जाता है। EPFO पेंशन के नियमों और eligibility को अच्छे से समझने के लिए कर्मचारियों को लेटेस्ट गाइडलाइंस और ऑफिशियल नोटिस पर नजर रखनी बहुत जरूरी है।
EPFO पेंशन नियमों को लेकर फैली बड़ी गलतफहमियां
आजकल सोशल मीडिया और अनऑफिशियल सोर्स की वजह से EPFO पेंशन को लेकर ढेर सारी मिथक फैल गए हैं, जिससे आम कर्मचारी कन्फ्यूज हो जाते हैं। कुछ लोग समझते हैं कि नौकरी कितने भी समय की हो, EPFO पेंशन अपने आप मिल जाएगी। वहीं कुछ को लगता है कि EPF अकाउंट में ज्यादा बैलेंस जमा होने से EPFO पेंशन बढ़ जाती है।
लेकिन असलियत ये है कि EPFO पेंशन के लिए सिर्फ सर्विस पीरियड और EPS (Employees’ Pension Scheme) में किया गया योगदान ही मायने रखता है, EPF का टोटल बैलेंस नहीं। एक और बड़ी भ्रांति ये है कि अगर सर्विस पीरियड पूरा न हो तो EPS (Employees’ Pension Scheme) का जमा पैसा पूरी तरह जब्त हो जाता है, जबकि सच में इसके लिए withdrawal के कई ऑप्शन मौजूद हैं। ऐसे में कर्मचारियों का अलर्ट रहना भविष्य में बड़ा फायदा दे सकता है।
क्या सिर्फ 10 साल नौकरी पर मिल सकती है EPFO पेंशन?
EPFO पेंशन नियमों के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद लाइफटाइम मंथली EPFO पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 साल की eligible सर्विस और EPS (Employees’ Pension Scheme) योगदान जरूरी है। यानी अगर कर्मचारी लगातार 10 साल या उससे ज्यादा समय तक EPS (Employees’ Pension Scheme) में कंट्रीब्यूट करता है, तो वो EPFO पेंशन का हकदार बन जाता है।
हालांकि EPFO पेंशन की अमाउंट सैलरी, सर्विस ईयर्स और योगदान के आधार पर तय होती है। यहां ये समझना भी जरूरी है कि 10 साल पूरे होने का मतलब सिर्फ जॉब में टिके रहना नहीं, बल्कि EPS (Employees’ Pension Scheme) योगदान लगातार और वैलिड तरीके से होना चाहिए। अगर 10 साल पूरे होने से पहले नौकरी छोड़ दी तो EPFO पेंशन नहीं मिलेगी, बल्कि EPS (Employees’ Pension Scheme) फॉर्मूला के हिसाब से withdrawal बेनिफिट मिल सकता है।
जॉब बदलने से EPFO पेंशन की eligibility पर क्या असर पड़ता है?
बहुत से कर्मचारी डरते हैं कि जॉब चेंज करने से उनकी सर्विस पीरियड ब्रेक हो जाएगी और EPFO पेंशन का फायदा गंवाना पड़ेगा, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। अगर जॉब बदलते वक्त कर्मचारी UAN (Universal Account Number) के जरिए अपना PF और EPS (Employees’ Pension Scheme) अकाउंट सही से ट्रांसफर कर ले, तो सर्विस पीरियड कंटीन्यूअस मानी जाती है।
मतलब जॉब बदलने से EPFO पेंशन eligibility खत्म नहीं होती, बस अकाउंट के डॉक्यूमेंट्स और रिकॉर्ड्स को अपडेट रखना पड़ता है। EPFO ने अब ये सारी प्रोसेस डिजिटल कर दी है, जिससे कर्मचारी ऑनलाइन ही सर्विस हिस्ट्री, EPF बैलेंस और EPS (Employees’ Pension Scheme) डिटेल्स चेक कर सकते हैं।
EPFO पेंशन का फायदा लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप भविष्य में मजबूत और सुरक्षित EPFO पेंशन चाहते हैं तो कुछ जरूरी बातें हमेशा याद रखें। सबसे पहले EPS (Employees’ Pension Scheme) योगदान की कन्फर्मेशन समय-समय पर EPFO पोर्टल से चेक करें।
दूसरा, जॉब बदलते वक्त फंड ट्रांसफर में कोई गलती न होने दें। तीसरा, सैलरी बढ़ने पर योगदान और EPFO पेंशन बेनिफिट पर पड़ने वाले प्रभाव को समझें। चौथा, 10 साल से पहले जॉब छोड़ने की सूरत में withdrawal ऑप्शन्स और पेंशन फ्रीज क्लेम की पूरी जानकारी रखें।











