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EPFO Update : EPFO ने EPS योगदान पर नए नियम किए लागू, कर्मचारियों में बढ़ी चिंता

By Rajat Sharma

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EPFO Update : हाल ही में EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) की ओर से एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने प्राइवेट और गवर्नमेंट सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को टेंशन में डाल दिया है। खबर ये है कि कुछ कर्मचारियों पर EPS (Employee Pension Scheme) में योगदान से जुड़ी सख्त शर्तें लागू हैं, जो उनकी आने वाली पेंशन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।

अगर EPS (Employee Pension Scheme) का योगदान बंद हो जाए या तय लिमिट से बाहर हो, तो भविष्य में पेंशन जीरो यानी बिल्कुल नहीं मिलने का रिस्क बहुत बढ़ जाता है। ये समस्या खासकर उन लोगों पर ज्यादा असर डालती है, जिनकी सैलरी तय सीमा से ऊपर है या जिन्होंने स्कीम में सही वक्त पर जरूरी कंट्रीब्यूशन नहीं किया।

किन कर्मचारियों पर EPS योगदान की सीमा लागू होती है?

EPS (Employee Pension Scheme) स्कीम के तहत योगदान सिर्फ उन कर्मचारियों से लिया जाता है, जिनकी बेसिक सैलरी और DA मिलाकर तय लिमिट के अंदर आती हो। हाई सैलरी वाले कई कर्मचारियों को EPS (Employee Pension Scheme) कटौती की इजाजत नहीं मिलती, जिससे उनकी रिटायरमेंट पेंशन अपने आप प्रभावित हो जाती है। साथ ही, वो कर्मचारी जो EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) के तहत जॉब शुरू करने के बाद EPS (Employee Pension Scheme) में टाइम लिमिट के अंदर ऑप्ट-इन नहीं करते, वो भी इस फायदे से महरूम रह सकते हैं।

EPS योगदान न होने पर भविष्य में क्या हो सकता है?

अगर किसी कर्मचारी के PF (Provident Fund) अकाउंट में लगातार कंट्रीब्यूशन हो रहा है, लेकिन EPS (Employee Pension Scheme) अकाउंट में पैसा नहीं जमा हो रहा, तो इसका डायरेक्ट इफेक्ट उनकी रिटायरमेंट पेंशन पर पड़ता है। EPS (Employee Pension Scheme) कंट्रीब्यूशन न होने पर PF (Provident Fund) का पैसा तो रिटायरमेंट पर मिल जाता है, लेकिन मंथली पेंशन का सिस्टम खत्म हो जाता है।

मतलब, बुढ़ापे में रेगुलर फाइनेंशियल सिक्योरिटी का कोई फायदा नहीं मिलेगा। EPS (Employee Pension Scheme) का मकसद रिटायरमेंट के बाद फिक्स्ड मंथली इनकम देना है, लेकिन अगर कंट्रीब्यूशन नहीं हुआ तो ये बेनिफिट खत्म हो जाता है और फाइनेंशियल रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए ये समझना बहुत जरूरी है कि EPS (Employee Pension Scheme) कंट्रीब्यूशन क्यों बंद है और क्या इसे दोबारा शुरू करवाया जा सकता है। कई लोग रूल्स से अनजान रहते हैं और बाद में पछताते हैं, इसलिए अवेयरनेस ही सबसे बड़ा प्रोटेक्शन है।

क्या EPS में बाद में एंट्री संभव है?

कई कर्मचारी इस कन्फ्यूजन में रहते हैं कि अगर शुरू में EPS (Employee Pension Scheme) कटौती नहीं हुई, तो क्या बाद में इसे स्टार्ट करवाया जा सकता है। EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) के गाइडलाइन्स के मुताबिक, कुछ स्पेशल केसेज में EPS (Employee Pension Scheme) में एंट्री पॉसिबल नहीं होती, खासकर तब जब कर्मचारी ने पहली जॉब में सैलरी लिमिट से ज्यादा कमाई की हो और EPS (Employee Pension Scheme) अकाउंट का कोई रिकॉर्ड न बना हो।

हालांकि, अगर कर्मचारी किसी दूसरे ऑर्गनाइजेशन में पहले से EPS (Employee Pension Scheme) मेंबर रहा है और बाद में सैलरी बढ़ने के बाद भी PF (Provident Fund) और UAN (Universal Account Number) लिंक्ड है, तो कुछ मामलों में EPS (Employee Pension Scheme) बेनिफिट जारी रह सकता है। लेकिन इसके लिए फॉर्मेलिटीज, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और EPFO (Employees’ Provident Fund Organisation) रूल्स फॉलो करना जरूरी है। बिना क्लियर इंफो के फैसला लेना फ्यूचर बेनिफिट्स को खराब कर सकता है।

कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?

EPS (Employee Pension Scheme) बेनिफिट्स को सेफ रखने के लिए कर्मचारियों को अपने PF (Provident Fund) और पेंशन अकाउंट्स की डिटेल्स टाइम-टू-टाइम चेक करते रहना चाहिए। UAN (Universal Account Number) पोर्टल पर लॉगिन करके सर्विस हिस्ट्री, जॉइंट डिक्लेरेशन, नॉमिनेशन, सैलरी डिटेल्स और EPS (Employee Pension Scheme) कटौती की स्टेटस चेक करना एक इंपॉर्टेंट स्टेप है।

अगर EPS (Employee Pension Scheme) कटौती में कोई इश्यू दिखे, तो HR डिपार्टमेंट या PF (Provident Fund) ऑफिस से फटाफट कांटैक्ट करें। इसके अलावा, कर्मचारियों को ये भी चेक करना चाहिए कि उनके डॉक्यूमेंट्स, खासकर KYC (Know Your Customer), आधार और बैंक डिटेल्स सही से लिंक्ड हों।

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