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Donald Trump: ट्रंप का बड़ा दावा – भारत-पाकिस्तान युद्ध मैंने रोका, वरना होता परमाणु संकट

By Rajat Sharma

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Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध को रोककर दुनिया को बड़े परमाणु संकट से बचाया। सोमवार को वॉशिंगटन के ओवल ऑफिस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में ये सनसनीखेज बयान दिया।

उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने छह युद्धों को खत्म कराया, जिनमें भारत और पाकिस्तान के बीच का तनाव भी शामिल था, जो एक बड़ा परमाणु खतरा बन सकता था। ट्रंप ने गर्व के साथ कहा, “मैंने छह महीनों में छह युद्ध सुलझाए, और उनमें से एक बहुत बड़ा परमाणु संकट था। भारत-पाकिस्तान का मसला भी इसमें शामिल था।”

पहले भी कर चुके हैं ऐसा दावा

ये कोई पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत-पाक तनाव को सुलझाने का दावा किया हो। इससे पहले भी वो कई बार इस बात को दोहरा चुके हैं। मई में अपनी सोशल मीडिया साइट ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने लिखा था कि उनकी मध्यस्थता के चलते भारत और पाकिस्तान तुरंत युद्धविराम पर सहमत हो गए थे। लेकिन भारत ने हमेशा ही उनके इन दावों को सिरे से खारिज किया है।

भारतीय सरकार का साफ कहना है कि पाकिस्तान के साथ युद्धविराम की सहमति किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से नहीं, बल्कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों (डीजीएमओ) की सीधी बातचीत से हुई थी।

भारत का सख्त खंडन

भारत ने न सिर्फ ट्रंप के दावों को नकारा है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में इस मुद्दे पर स्थिति साफ की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि किसी भी देश के नेता ने भारत से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रोकने के लिए नहीं कहा था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी दो टूक कहा कि युद्धविराम में किसी बाहरी हस्तक्षेप का सवाल ही नहीं उठता। दोनों देशों ने अपनी बातचीत से मसले को सुलझाया था।

क्या है इस दावे की सच्चाई?

ट्रंप के बार-बार के दावों ने भारत-पाक तनाव और उनकी कथित मध्यस्थता को लेकर चर्चा को हवा दी है। लेकिन भारत का रुख बिल्कुल साफ है कि इस मामले में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। ट्रंप का ये बयान भले ही सुर्खियां बटोर रहा हो, लेकिन भारत सरकार ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। अब सवाल ये है कि क्या ट्रंप अपने बयानों से वैश्विक मंच पर सुर्खियां बटोरना चाहते हैं, या फिर इसके पीछे कोई और सियासी मकसद है?

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