Russia-Ukraine War : रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में एक बड़ा कदम उठा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। ये मुलाकात इतनी खास थी कि जेलेंस्की ने इसे अब तक की सबसे सकारात्मक और शानदार बातचीत बताया।
इस दौरान दोनों नेताओं ने यूक्रेन को दी जाने वाली सुरक्षा गारंटी पर गंभीरता से चर्चा की। जेलेंस्की ने यूरोपीय नेताओं के साथ एक बैठक में कहा, “ट्रंप के साथ हमारी बातचीत बहुत अच्छी रही। ये अब तक की सबसे बेहतरीन मुलाकात थी, और शायद भविष्य में इससे भी अच्छी बातचीत हो!”
ट्रंप ने पहले क्या कहा?
इस मुलाकात से पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने लिखा कि अगर जेलेंस्की समझौते के लिए तैयार हों, तो युद्ध को तुरंत रोका जा सकता है। ट्रंप ने साफ कहा कि यूक्रेन न तो क्रीमिया वापस ले सकता है और न ही नाटो का हिस्सा बन सकता है। उन्होंने ये भी दावा किया कि कुछ चीजें कभी नहीं बदलतीं।
जवाब में जेलेंस्की ने कहा कि सभी की ख्वाहिश है कि युद्ध जल्दी खत्म हो, लेकिन शांति टिकाऊ होनी चाहिए, न कि अस्थायी। उन्होंने ये भी जोड़ा कि रूस को क्रीमिया और डोनबास जैसे इलाकों से फिर से हमला करने का मौका नहीं मिलना चाहिए।
जेलेंस्की की नाटो और यूरोपीय नेताओं से मुलाकात
इससे पहले जेलेंस्की ने नाटो महासचिव मार्क रुटे और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से साउथ पोर्टिको में मुलाकात की थी। इस दौरान जर्मनी, फिनलैंड, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन के बड़े नेता भी मौजूद थे। जेलेंस्की ने ट्रंप से मुलाकात से पहले साफ किया कि युद्ध को रोकने के लिए रूस पर दबाव डालना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका मुख्य मकसद स्थायी शांति हासिल करना है।
क्या होगा युद्ध का भविष्य?
यह मुलाकात रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए एक नया मोड़ ला सकती है। ट्रंप और जेलेंस्की की इस सकारात्मक बातचीत ने दुनिया भर में उम्मीद जगाई है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये चर्चा वाकई में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी? जेलेंस्की की बातों से साफ है कि वो किसी भी कीमत पर टिकाऊ शांति चाहते हैं। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि इस मुलाकात का असर युद्ध के मैदान पर कैसे दिखता है।











