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FATF Warning to Pakistan : पाकिस्तान पर FATF की नजर, जैश और लश्कर फंडिंग पर उठाया सवाल

By Rajat Sharma

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FATF Warning to Pakistan : अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच आज इस्तांबुल में दूसरे दौर की शांति वार्ता होने वाली है, और ये मौका तुर्की सरकार के प्रतिनिधि संभालेंगे। तालिबान सरकार के उप गृह मंत्री हाजी नजीब इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कौन आ रहा है, ये अभी साफ नहीं हुआ।

बैठक में स्थायी युद्धविराम और सीमा सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों पर बात होगी। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की ये कोशिश कितनी कामयाब होगी, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन उम्मीदें कायम हैं।

क्यों छिड़ा है दोनों देशों में ये खूनी संघर्ष?

दरअसल, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठन को शरण देने का इल्जाम लगाया। इसी गुस्से में 10 अक्टूबर की रात को पाकिस्तान ने काबुल समेत कई शहरों पर हवाई हमले कर दिए। जवाब में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर ISIS आतंकियों और लड़ाकों को मदद पहुंचाने का आरोप ठोका और तुरंत काउंटर अटैक किया।

करीब 5 दिनों तक डूरंड लाइन पर दोनों तरफ की सेनाओं के बीच जमकर गोलीबारी हुई, जिसमें सैनिकों के साथ आम लोग भी मारे गए। दोनों ने एक-दूसरे की चौकियों पर कब्जा भी कर लिया, जिससे माहौल और खराब हो गया।

कतर और तुर्की की मध्यस्थता से मिली शांति की किरण

हवाई हमलों और फायरिंग का सबसे बुरा असर पाकिस्तान के चमन और अफगानिस्तान के स्पिन बोल्डाक इलाके में पड़ा, जहां पाक के एयर स्ट्राइक में अफगान क्रिकेटर्स की जान भी चली गई। फिर 15 अक्टूबर को कतर के दोहा में हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने 48 घंटे का अस्थायी युद्धविराम घोषित कर दिया।

इसके बाद 19 अक्टूबर को कतर और तुर्की की ब्रोकरिंग से स्थायी युद्धविराम पर सहमति बन गई। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्री मुल्ला मुहम्मद याकूब और पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने इस शांति समझौते पर दस्तखत किए। ये कदम दोनों देशों के लिए राहत की सांस लाने वाला है।

डूरंड लाइन पर क्यों उबल रहा है विवाद का चूल्हा?

ये सब कुछ 1893 में खींची गई डूरंड लाइन को लेकर ही तो है। पाकिस्तान इसे अपनी आधिकारिक सीमा मानता है, लेकिन अफगानिस्तान को इस पर हमेशा ऐतराज रहा। 2021 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया, तो बॉर्डर पर तनाव चरम पर पहुंच गया।

पाकिस्तान में TTP के आतंकियों ने दहशत मचा रखी है, और पाक का दावा है कि अफगानिस्तान उन्हें पनाह दे रहा। तालिबान ने ये आरोप सिरे से खारिज कर दिए। उधर, अफगानिस्तान का कहना है कि पाक ISIS-K को सपोर्ट कर रहा, जिसे पाकिस्तान बेबुनियाद बता रहा। ये पुराना घाव आज भी दोनों को कुरेद रहा है।

संघर्ष और हिंसा का काला साया: व्यापार-व्यापारी सब तबाह

ताजा झड़पों के बाद पाकिस्तान ने डूरंड लाइन सील करने के लिए बार्बेड वायर लगाने की कोशिश की, तो सैनिकों और लोकल लोगों के बीच हिंसक भिड़ंत हो गई। अब सीमा बंद है, तो अफगानिस्तान के चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मुताबिक व्यापारियों को रोज लाखों डॉलर का चूना लग रहा।

हजारों लोग बेघर हो चुके, और ट्रेड रूट्स ठप होने से दोनों तरफ का बिजनेस रुक गया। व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा, और आम जिंदगी पर भी बुरा असर पड़ा। ये सब जल्द खत्म हो, यही सबकी दुआ है।

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