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Bhai Dooj Muhurat : इस भाई दूज पर शुभ मुहूर्त छोटा लेकिन खास, जानें कब करें भाई का तिलक

By Rajat Sharma

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Bhai Dooj Muhurat : भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व भाई दूज हर साल दीपावली के बाद मनाया जाता है। यह दिन उस अटूट रिश्ते को समर्पित है जिसमें बहन अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है।

भाई दूज के दिन बहनें यम देव की पूजा करती हैं, भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं और राखी समान रक्षा सूत्र बांधती हैं। बदले में भाई अपनी बहनों को उपहार और स्नेह देते हैं।

भाई दूज 2025 का महत्व

इस साल भाई दूज का पर्व और भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन आयुष्मान योग और शिववास योग जैसे दो अत्यंत शुभ संयोग एक साथ बन रहे हैं।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इन योगों में पूजा और तिलक करने से व्यक्ति को आरोग्यता, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।

भाई दूज 2025 का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 23 अक्टूबर 2025 की रात 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगी।

इस दिन तिलक और पूजा का शुभ समय दोपहर 01:13 बजे से 03:28 बजे तक रहेगा।

अर्थात् इस वर्ष बहनों के पास भाई को तिलक करने के लिए सिर्फ 2 घंटे 15 मिनट का स्वर्णिम समय रहेगा।

आयुष्मान योग का महत्व

भाई दूज के दिन आयुष्मान योग बन रहा है, जो 24 अक्टूबर की सुबह 5:00 बजे तक रहेगा।

धार्मिक मान्यता है कि इस योग में यम देव की आराधना करने से व्यक्ति को निर्भयता, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

शिववास योग से बढ़ेगा शुभफल

इस वर्ष भाई दूज पर शिववास योग भी बन रहा है, जो 23 अक्टूबर की रात 10:46 बजे तक रहेगा।

इस दौरान भगवान शिव कैलाश पर्वत पर माता पार्वती के साथ निवास करेंगे।

ज्योतिष के अनुसार, इस योग में शिव-परिवार की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में पारिवारिक सौहार्द और सुख-शांति बनी रहती है।

भाई दूज से जुड़ी पौराणिक कथा

पुराणों में वर्णन मिलता है कि कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर पहुंचे थे।

यमुना ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया, पूजा-अर्चना की और स्वादिष्ट भोजन कराया। खुश होकर यमराज ने वचन दिया कि जो भी बहन इस दिन अपने भाई का सत्कार करेगी, उसका भाई लंबी आयु और सुखी जीवन का आनंद पाएगा।

तभी से यह पर्व “भाई दूज” के रूप में मनाया जाने लगा।

क्या करें और क्या न करें

शुभ मुहूर्त में ही तिलक और पूजा करें। यमराज और यमुना देवी की पूजा अवश्य करें।

तिलक के समय कपूर, रोली, अक्षत और दीपक का उपयोग करें।

शाम के समय तिलक न करें, इसे अशुभ माना गया है।

भाई दूज सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और प्रेम का अद्भुत उत्सव है। इस वर्ष जब दो शुभ योग बन रहे हैं, तो पूजा-तिलक का फल और भी ज्यादा बढ़ जाएगा।

इसलिए सही मुहूर्त का पालन करें और इस पवित्र दिन को पूरे श्रद्धा-भाव से मनाएं।

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