Healthy Eating Tips : आजकल बदलती लाइफस्टाइल में फ्रोज़न सब्ज़ियां और रेडी-टू-ईट फूड कई लोगों की डाइट का हिस्सा बन चुके हैं।
वहीं, जंक और प्रोसेस्ड फूड का क्रेज़ भी तेजी से बढ़ा है। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या ये सेहत के लिए वाकई सही विकल्प हैं? आइए जानते हैं एक्सपर्ट की राय।
फ्रोज़न फूड – ताजे फलों और सब्ज़ियों जितना फायदेमंद?
फ्रोज़न सब्ज़ियों और फलों को आमतौर पर उस वक्त फ्रीज़ किया जाता है जब वे पूरी तरह से पके और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इसीलिए इनमें पोषण लगभग ताजे फलों-सब्ज़ियों जितना ही रहता है।
हालांकि, खरीदते वक्त यह ज़रूरी है कि पैकेट पर लिखे न्यूट्रिशन वैल्यू, पैकेजिंग डेट और स्टोरेज गाइडलाइन को ध्यान से पढ़ें। पैकेजिंग जितनी नई होगी, पोषण उतना ही बेहतर मिलेगा।
जंक फूड की लत से कैसे पाएं छुटकारा
जंक और प्रोसेस्ड फूड खाने की लत धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इससे छुटकारा पाने का पहला कदम है इस आदत को स्वीकारना।
शुरुआत में ठान लें कि महीने में दो बार से ज़्यादा जंक फूड नहीं खाएंगे।
अपने इस नियम को सिर्फ सोचें नहीं बल्कि घर के अलग-अलग हिस्सों में लिखकर लगाएं।
अगर एकदम से छोड़ना मुश्किल हो तो मात्रा कम करना शुरू करें। जैसे – पिज़्ज़ा खाने का मन हो तो फ्रेंच फ्राइज़ की जगह सलाद चुनें, कोल्ड ड्रिंक की जगह पानी या फ्रेश जूस लें।
“सुपर साइजिंग” ऑफर्स से बचें, क्योंकि ये सिर्फ आपकी जेब ही नहीं सेहत को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर भोजन शामिल करें, ताकि जंक फूड की लालसा अपने आप कम हो जाए।
शिशुओं के लिए शुरुआती आहार
छह महीने की उम्र के बाद बच्चे को धीरे-धीरे सॉलिड फूड दिया जा सकता है। शुरुआत पका हुआ और मैश किया हुआ भोजन से करें, जैसे – केला, आलू, शकरकंद, गाजर, पालक, सेब या नाशपाती।
चिकन प्यूरी भी एक अच्छा विकल्प है।
शुरुआत में एक बार में सिर्फ एक ही नया फूड दें ताकि एलर्जी का अंदाज़ा लगाया जा सके।
डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे चीज़ और दही चुनते वक्त ध्यान रखें कि उनमें शुगर न मिलाई गई हो।
धीरे-धीरे बच्चे के भोजन की मात्रा बढ़ाएं और उसे पौष्टिक खिचड़ी या दाल-चावल भी खिलाएं।











