Rehan Qureshi : 2017 की एक गर्म दोपहर। स्कूल से घर लौट रही 11 साल की मासूम बच्ची को रास्ते में एक आदमी मिला। लंबी दाढ़ी, शांत चेहरा और हाथ में छोटा-सा बैग। उसने प्यार भरी आवाज में कहा, “बेटी, तेरी मम्मी ने गीजर मंगवाया है, चलो दिखा दूं कहां लगाना है।” बच्ची उसके साथ चल पड़ी। लेकिन कुछ घंटों बाद उसके साथ जो हुआ, उसकी आग आज तक नहीं बुझी।
आरोपी था रेहान कुरैशी। पुलिस उसे सीरियल सेक्स ऑफेंडर कहती थी। मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे में उसके खिलाफ 22 मामले दर्ज थे। इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। ये बात हर किसी को हैरान कर रही है। आखिर कोर्ट ने रेहान को किस आधार पर रिहा किया? चलिए जानते हैं पूरी कहानी।
अदालत में क्या हुआ?
मुंबई की स्पेशल POCSO जज नीता एस. अनेकर ने 31 पन्नों के फैसले में साफ कहा—बच्ची के साथ घटना जरूर हुई है, लेकिन ये साबित नहीं हो सका कि अपराधी रेहान कुरैशी ही था। जज ने माना कि बच्ची का बयान पूरी तरह भरोसेमंद था। उसने जो दर्द झेला, वो सच था। मगर सबसे बड़ी गलती हुई पहचान परेड में। रेहान के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इसी वजह से उसे बरी कर दिया गया।
कौन है रेहान कुरैशी?
रेहान कुरैशी पर 22 POCSO मामले दर्ज हैं। अलग-अलग थानों में, अलग-अलग पीड़िताओं के आरोप। अब तक वो तीन मामलों में बरी हो चुका है। बाकी 19 केस अभी कोर्ट में चल रहे हैं।
पहचान की भूल ने पलट दिया केस
पुलिस ने रेहान को एक दूसरे मामले में पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। जेल में ही पहचान परेड कराई गई। लेकिन जांच में कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं। पीड़िता ने आरोपी को सिर्फ कुछ मिनटों के लिए देखा था—वो भी 2017 में। पहचान परेड कई महीनों बाद हुई।
इतने समय बाद बच्ची के लिए सही पहचानना मुश्किल था। इन कमियों ने पूरा केस कमजोर कर दिया। जज ने कहा, “घटना तो हुई, लेकिन ये साबित नहीं हुआ कि रेहान ही गुनहगार था। ऐसे में उसे संदेह का लाभ देना पड़ेगा।”
हालांकि कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को आदेश दिया कि बच्ची को मुआवजा जरूर दिया जाए। क्योंकि ये साबित हो चुका था कि उसके साथ अत्याचार हुआ है।











