15 अगस्त को ही क्यों आजाद हुआ भारत

डिजिटल डेस्क : 15 अगस्त आते ही देश की आजादी को ले कर तमाम सवाल मन में घूमने लगते हैं। देश को 15 अगस्त को ही आजादी क्यों मिली? आजादी 1947 को ही क्यों दी गई,? देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने जवाहरलाल नेहरू ने रात 12 बजे ही क्यों देश आजाद होने की घोषणा करते हुए संबोधित किया? इन सभी सवालों के जवाब ऐसे हैं, जिनके जवाब के लिए देश की आजादी के इतिहास के पन्ने पलटे जाएं तो भी शायद न मिलें। और आज के नवजवानों के मन में ये सवाल उठें तो शायद बड़ेबुजुर्ग भी उनके इन सवालों के जवाब न दे पाएं।

भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर भारत की आजादी की तारीख किस तरह तय हुई, इसके बारे में जानने की कोशिश करते हैं। ऐसा नहीं था कि देश की आजादी की तारीख 15 अगस्त पहले से ही तय थी। भारत को आजादी दिलाने और ब्रिटेन के शासकों से भारत के नेताओं को सत्ता सौंपने के लिए जिम्मेदार भारत के अंतिम वायसराय लार्ड माउंटबेटन 30 जून,1948 को भारत को आजाद करना चाहते थे। जबकि जवाहरलाल नेहरू के मन में देश की आजादी के लिए 26 जनवरी तारीख फिक्स थी। पर इन दोनों तारीखों में से एक भी तारीख फिक्स नहीं हुई और 15 अगस्त की तारीख देश की आजादी के लिए फिक्स हो गई।

कांग्रेस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार 1929 में ब्रिटिश सरकार से पूर्ण स्वराज की मांग की थी और 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा भी कर दी थी। उसके बाद से कांग्रेस 1930 से 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाती आ रही थी। नेहरू के मन में भी था कि 26 जनवरी को देश का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाए। शायद इसीलिए जब देश का संविधान 1950 में अस्तित्व में आया तो गणतंत्र दिवस के रूप में 26 जनवरी को मनाने का निश्चय किया गया।

भारत को स्वतंत्रता देने के लिए फरवरी, 1947 में इंग्लैंड से वायसराय के रूप में माउंटबेटन को भेजा गया था। माउंटबेटन ने भारत को स्वतंत्रता देने का जो प्लान बनाया था, उसे जून-3 माउंटबेटन प्लान के रूप में जाना गया। उसमें प्रस्ताव पास किया गया था कि ब्रिटिश सरकार की ओर से 30 जून, 1948 को सारे पावर्स भारत को सौंप दिए जाएंगे। पर भारत के नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। उनका कहना था कि भारत अब इतने लंबे समय तक आजादी का इंतजार करने वाला नहीं है। जब माउंटबेटन ने कहा कि 30 जून, 1948 को ब्रिटिश सरकार की ओर से भारत को पावर सौंपे जाएंगे तो कांग्रेसी नेता चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य ने कहा था कि ब्रिटिश सरकार जो 1948 में पावर सौंपने की बात करती है, तब तक ब्रिटिश सरकार के पास पावर बचेंगे ही नहीं तो वह किस पावर को सौंपने की बात कर रही है।

1946 से 1947 के बीच देश में ब्रिटिश सरकार के विरोध में जो माहौल बना, उससे वायसराय माउंटबेटन को अपना प्लान बदलना पड़ा। इसके बाद देश की आजादी के लिए फिर एक प्लान बनाया जिसे 4 जुलाई 1947 को ब्रिटेन के हाउस आफ कामंस में चर्चा के लिए रखा गया। इस पर ब्रिटिश संसद ने चर्चा कर के15 दिन में पास कर दिया। इस प्रस्ताव में भारत को आजादी देने की तारीख 15 अगस्त, 1947 तय की गई थी। माउंटबेटन ने 15 अगस्त की तारीख तय कर के सभी को दिलासा दिया था कि इस तारीख को सत्ता का हस्तांतरण करने से किसी तरह का कोई दंगा-फसाद या खूनखराबा नहीं होगा। परंतु हुआ इसका उल्टा। सत्ता के हस्तांतरण पर पूरी दुनिया ने बहुत बड़ा दंगा और खूनखराबा भारतीय उपमहाद्वीप में देखा।

सवाल यह है कि माउंटबेटन ने भी 15 अगस्त को स्वतंत्रता के लिए क्यों मुहर लगाई? इसके लिए माउंटबेटन का 15 अगस्त के प्रति लगाव माना जाता है। एक इंटरव्यू में माउंटबेटन ने कहा भी था कि भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख तय करने के पीछे वजह यह थी कि मैं चाहता था कि सभी को याद रहे कि भारत के नेताओं को सत्ता सौंपने के पूरे घटनाक्रम के पीछे सूत्रधार मैं ही था। इसीलिए मैं ने 15 अगस्त की तारीख तय की थी। इसका कारण यह था कि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान 15 अगस्त, 1945 को जापान ने एलाइड फोर्स के सामने आत्मसमर्पण किया था। इस तरह 15 अगस्त का भारत के अंतिम वायसराय माउंटबेटन के जीवन में महत्व था, इसलिए उन्होंने भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख तय की थी।

अब सवाल यह उठता है कि 15 अगस्त की तारीख भारत की स्वतंत्रता के लिए तय हुई तो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में जवाहरलाल नेहरू ने देश को 14 अगस्त की मध्यरात्रि को क्यों संबोधित किया? इसका जवाब यह मिलता है कि जब देश की आजादी के लिए माउंटबेटन ने 15 अगस्त की तारीख की घोषणा की तो देश के प्रख्यात ज्योतिषियों ने कहा था कि 15 अगस्त, 1947 के लिए शुभ नहीं है। ज्योतिषियों ने इस दिन को बदलने की बात की तो माउंटबेटन जिद कर बैठे।

परिणामस्वरूप ज्योतिषियों से आग्रह किया गया कि वे कोई ऐसी शुभ घड़ी खोजें, जिस समय भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है की घोषणा की जा सके। ज्योतिषियों ने अभिजीत मुहूर्त का हवाला दे कर पंडित नेहरू को सलाह दी कि 14 अगस्त की रात 11.51 से 12.39 के बीच का समय भारत की स्वतंत्रता की घोषणा के लिए एकदम उचित है और ठीक 12 बजे मध्यरात्रि को स्वतंत्रता की घोषणा करते हुए शंखनाद होना चाहिए। परिणामस्वरूप पंडित नेहरू ने मध्यरात्रि 12 बजे रेडियो पर देश की स्वतंत्रता की घोषणा करने के साथ अपना प्रख्यात भाषण दिया। इस तरह ज्योतिषियों की मुहूर्त भी शामिल हो गई और माउंटबेटन की जिद भी पूरी हो गई।

वीरेंद्र बहादुर सिंह
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