दुनिया की एक अरब जनसंख्या जब हो जाएगी बेहद गरीब

टीम डिजिटल  : आज दुनियाभर में जिस तरह से कोविड -19 का कहर जारी है उसे देखकर यह उम्मीद की जा सकती है कि जल्दी ही दुनिया की लगभग एक अरब जनसंख्या बेहद गरीबी की श्रेणी में नजर आएगी सोचिए तब स्थिति क्या होगी ? आज किसी न किसी तरह दुनिया के हर देश इस कोविड -19 नामक महामारी के बीच भी खुद को मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं फिर भी स्थिति को पूरी तरह से सामान्य करने में अब तक असफल ही रहे हैं । ऐसे में देखा जाए तो सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला वर्ग गरीबों का रहा है जिसका सम्पूर्ण जीवनकाल आज कमाने आज खाने में ही गुजर जाता है । वे हमेशा अपने लिए कोई भी भविष्य निधि बनाने में असमर्थ रहे हैं क्योंकि मेहनत मजदूरी कर उतनी ही आमदनी एकत्रित हो पाती है कि जिससे वो अपने वर्तमान को चला सकें। अब बात यह उठती है कि कोविड -19 से बचाव स्वरूप जो लॉकडाउन मजबूरन दुनियाभर के लगभग हर देशों को अपनाना पड़ा उससे यह रोज कमाने और रोज खाने वाले वर्ग रोजगार विहीन हो गए। ऐसे में यह वर्ग आखिर किस श्रेणी में जाएगा ? यह हम सब जानते हैं यह वर्ग अत्यंत गरीब की श्रेणी में आ जाएगा। आज की स्थिति के मद्देनजर यह कह सकते हैं कि अत्यंत गरीब की श्रेणी में जुड़े ३९.५ करोड़ लोगों में से आधे से अधिक लोग दक्षिण एशिया से होंगे । रिपोर्टों पर गौर करें तो वहाँ दावा किया जा रहा है कि दक्षिण एशिया का क्षेत्र गरीबी की मार झेलने वाला दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्र सिद्ध होगा । अध्ययनकर्ताओं की माने तो इस कोरोना काल के चलते विकासशील देशों में गरीबी का ग्राफ नाटकीय रूप से बढ़ जाएगा जिसका सीधा प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिलेगा । दक्षिण एशिया व पूर्वी एशिया जिस गरीबी को कम करने के लिए आज तक प्रयासरत हैं मगर अपने लक्ष्यों से पिछड़े हुए हैं ऐसे यह वैश्विक महामारी उस गरीबी को बढ़ाने में सहायक बन रही है। बात अगर हम हमारे भारत देश की करें तो यह भी एक मध्यमवर्गीय आय वाला विकासशील देश ही है जहाँ गरीबी पहले से ही चरम पर थी जो इस कोविड -19 के चलते एक भयावह रूप में तब्दील हो रही है । ऐसे में यह कहना बिल्कुल ही गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में रिपोर्टों के जो आंकड़े दिए जा रहे हैं उन एक अरब गरीबों की तादात में भारत अग्रणी भूमिका निभाएगा। यह आंकड़ें जो गरीबी से जुड़ी हैं वैश्विक विकासात्मक अर्थशास्त्र शोध संस्थान के एक जर्नल में शोधार्थियों द्वारा प्रकाशित किया गया है। जिसमें इस बढ़ती गरीबी के आंकड़ों का मूल कारण कोविड -19 को माना गया है । यह आंकड़ें किस सीमा तक सही हैं यह कहना मुश्किल है पर हकीकत तो यही है कि भावी परिस्थिति इस बात की तरफ इशारा जरूर कर रही है कि कोविड -19 ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को लगभग ध्वस्त कर दिया है जिसका सीधा असर हर एक जन-मानस पर पड़ा है। ऐसे में जब दुनिया की एक अरब जनसंख्या जब अत्यंत गरीबी की चपेट में आ जाएगी तो स्थितियां बद से बदतर हो जाएंगी। अपराध के हर क्षेत्र में बढ़ावा देखने को मिलेगा । भूख से मरने वालों की संख्या में इजाफा देखा जाएगा जिससे विश्व प्रसन्नता सूचकांकों में भारी ह्रास देखने को मिल सकता है। महज एक सूक्ष्म वायरस जो मानव की सम्पूर्ण जीवनशैली को प्रभावित करेगी जिससे जन-जीवन का पूर्णतया अस्त-व्यस्त होना लाजिमी है। जो कोविड -19 इस गरीबी के स्तर को बढ़ाने का प्रतिनिधित्व कर रहा है अब उसका खात्मा बेहद जरूरी हो चुका है नहीं तो यह मानव जाति के आज और कल में भूचाल ला देगा जिससे मानवीय जीवनशैली व जन-मानस पटल पर एक अंजाने से डर का साम्राज्य स्थापित हो जाएगा । अतः इस गरीबी के ग्राफ को कम करने हेतु इस कोविड -19 वायरस से मिलकर लड़ना पूरी दुनिया के लिए बेहद जरूरी हो गया है। नहीं तो यह महामारी अपनी जानलेवा बीमारी से पूरी दुनिया को ही खत्म कर देगी ।

रचनाकार :- मिथलेश सिंह ‘मिलिंद’
मरहट पवई आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश)
9682472270
mith3032@gmail.com

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