कमजोर प्रशासनिकी बनी तीरथ के सीएम पद से इस्तीफे की वजह

देहरादून। सीएम रहते हुए तीरथ रावत एक डीएम तक नहीं बदल पाए। अपने करीब चार महीने के कार्यकाल में उन्होंने न सचिवालय और न ही फील्ड में प्रशासनिक अफसरों कोई बहुत बड़ा फेरबदल किया। इसे भी उनकी प्रशासनिक कमजोरी के रूप में आंका जा रहा है।

खुलकर फैसले लेने से बचने की उनकी इस आदत ने नौकरशाही को हावी होने दिया। आमतौर पर सीएम बदलते ही सबसे पहले जिलाधिकारियों के तबादले होने आम बात रहती है। इस मामले में तीरथ सरकार का पूरा कार्यकाल ऐसे ही निकल गया। उनके राज में एक भी डीएम नहीं बदला गया। यही स्थिति सचिवालय की नौकरशाही की रही। चंद लोगों को छोड़ दें, तो अधिकतर के पास पुराने ही चार्ज रहे।

सिर्फ सीएम सचिवालय में जरूर उन्होंने गिनती के बदलाव किए। तीरथ रावत अपनी टीम बनाने में भी सफल नहीं रहे। एक प्रमुख सलाहकार, एक सलाहकार, एक पीआरओ, दो ओएसडी के अलावा अन्य कोई टीम में नहीं रहा।

जबकि ओएसडी, पीआरओ की लाइन में कई लोग खड़े थे। बावजूद इसके वे चयन करने के मामले में खासे पीछे रहे। यही वजह रही, जो उनकी टीम बेहद छोटी और सीमित रही। प्रशासनिक मामले में वो अपनी पकड़ दिखाने में विफल रहे।

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